आसनसोल : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण के मतदान को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए निर्वाचन आयोग ने सख्त प्रशासनिक कदम उठाए हैं। सोमवार को जारी आधिकारिक निर्देश के अनुसार, मतदान वाले क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से शराब की बिक्री, भंडारण और परोसने पर रोक लगा दी गई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी होटल, रेस्तरां, बार, क्लब या लाइसेंसधारी दुकान में मदिरा बिक्री की अनुमति नहीं होगी।
पश्चिम बर्धमान जिले की नौ विधानसभा सीटें भी प्रथम चरण के मतदान में शामिल हैं। ऐसे में जिलेभर में शराब की दुकानों को बंद रखने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। प्रशासन ने कहा है कि यह आदेश मतदान समाप्त होने तक प्रभावी रहेगा। आदेश के बाद सोमवार सुबह से जिले के विभिन्न हिस्सों—आसनसोल, दुर्गापुर, रानीगंज, कुल्टी, जामुड़िया, पांडवेश्वर और अन्य इलाकों में शराब दुकानें बंद रहीं।
निर्वाचन आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 135(सी) का हवाला देते हुए कहा है कि चुनाव के दौरान मतदाताओं को प्रभावित करने, अनुचित प्रलोभन देने या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की आशंका को रोकने के लिए यह व्यवस्था लागू की गई है। आयोग का मानना है कि चुनाव के समय मदिरा वितरण अक्सर विवाद, तनाव और अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देता है। इसी कारण संवेदनशील और मतदान क्षेत्रों में यह प्रतिबंध आवश्यक है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राज्य में 23 अप्रैल को प्रथम चरण के तहत उत्तर बंगाल, जंगलमहल और दक्षिण बंगाल की कुल 152 सीटों पर मतदान होना है। इन निर्वाचन क्षेत्रों के साथ-साथ सटे सीमावर्ती इलाकों में भी मदिरा बिक्री बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने पड़ोसी जिलों तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ा दी है, ताकि बाहर से अवैध आपूर्ति न हो सके।
इसके अतिरिक्त, दूसरे चरण के मतदान के लिए 29 अप्रैल को कोलकाता सहित अन्य क्षेत्रों में भी इसी प्रकार की पाबंदी लागू रहेगी। आयोग ने साफ किया है कि प्रत्येक चरण के मतदान से पहले और मतदान अवधि के दौरान संबंधित क्षेत्रों में ड्राई डे घोषित किया जाएगा। वहीं 4 मई को मतगणना दिवस पर पूरे राज्य में पूर्ण रूप से शराब बिक्री प्रतिबंधित रहेगी।
जिला प्रशासन ने आबकारी विभाग, पुलिस और विशेष निगरानी दलों को संयुक्त रूप से सक्रिय कर दिया है। विभिन्न स्थानों पर छापेमारी अभियान, वाहनों की जांच और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि चुनाव को प्रभावित करने के लिए शराब के अवैध भंडारण या वितरण की किसी भी कोशिश को विफल किया जाएगा।
दुकानदारों ने बताया कि उन्हें विभागीय आदेश मिलते ही बिक्री बंद करनी पड़ी। कुछ व्यापारियों ने कहा कि अचानक आदेश लागू होने से बिक्री प्रभावित हुई है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सर्वोपरि है। वहीं कई ग्राहकों को सुबह दुकान बंद मिलने पर निराश लौटना पड़ा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के समय शराब पर रोक अब सामान्य प्रक्रिया बन चुकी है, लेकिन इस बार आयोग ने अतिरिक्त सतर्कता दिखाई है। इससे संकेत मिलता है कि प्रशासन किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए पहले से तैयार है।
निर्वाचन आयोग ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति, संस्था या व्यवसायिक प्रतिष्ठान के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लाइसेंस रद्द करने से लेकर दंडात्मक मुकदमे तक दर्ज किए जा सकते हैं।
फिलहाल, पश्चिम बर्धमान सहित मतदान वाले सभी क्षेत्रों में प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। आयोग का उद्देश्य साफ है—मतदाता निर्भय होकर मतदान करें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर किसी प्रकार का प्रभाव न पड़े। चुनावी माहौल के बीच यह आदेश चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

















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