आसनसोल : पश्चिम बंगाल की राजनीति में फुटबॉल को लेकर नई बहस सामने आई। भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस पर राज्य में खेलों के विकास को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि फुटबॉल बंगाल की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा खेल है, इसलिए इसके विकास के लिए केवल राजनीतिक प्रतीक या बड़े आयोजनों के बजाय जमीनी स्तर पर सुविधाओं को मजबूत करना आवश्यक है।
उनकी टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है, जब निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे विवाद के बीच दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। आयोग के 18 सितंबर के निर्णय के अनुसार ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम तथा ‘लिफाफा’ चिह्न मिला है।
चुनाव चिह्न को लेकर राजनीतिक चर्चा
फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिह्न मिलने के बाद बंगाल की राजनीति में खेल और राजनीति के संबंध को लेकर चर्चा तेज हुई है। अग्निमित्रा पॉल ने इसी संदर्भ में ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि फुटबॉल को राजनीतिक पहचान देने के बजाय खिलाड़ियों के लिए बेहतर अवसर तैयार किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में युवा फुटबॉल को अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। इसके लिए स्थानीय मैदान, प्रशिक्षित कोच, आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्था, क्लबों को सहयोग और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। उनके अनुसार, खेल का वास्तविक विकास तभी माना जाएगा, जब इसका लाभ स्थानीय खिलाड़ियों तक पहुंचे।
मेसी के कोलकाता दौरे का उल्लेख
अग्निमित्रा पॉल ने अर्जेंटीना के प्रसिद्ध फुटबॉलर लियोनेल मेसी के पिछले वर्ष कोलकाता दौरे का भी उल्लेख किया। दिसंबर 2025 में साल्ट लेक स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अव्यवस्था और दर्शकों के विरोध की स्थिति बनी थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने माफी मांगी और मामले की जांच की घोषणा की थी। इस घटनाक्रम को लेकर बाद में राजनीतिक बहस भी हुई।
अग्निमित्रा पॉल का कहना है कि किसी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की मेजबानी अपने आप में राज्य के खेल ढांचे के विकास का प्रमाण नहीं है। उनके अनुसार, प्राथमिकता स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण और बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने की होनी चाहिए।
बंगाल की फुटबॉल संस्कृति
पश्चिम बंगाल में फुटबॉल का लंबा इतिहास रहा है। कोलकाता सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय क्लबों और मैदानों से बड़ी संख्या में युवा जुड़े हैं। मोहन बागान, ईस्ट बंगाल और मोहम्मडन स्पोर्टिंग जैसे क्लबों ने बंगाल की फुटबॉल संस्कृति को व्यापक पहचान दिलाई है।
इसी पृष्ठभूमि में फुटबॉल खिलाड़ी चुनाव चिह्न को लेकर राजनीतिक बयानबाजी का महत्व बढ़ गया है। हालांकि खेल से जुड़े मुद्दों पर विभिन्न राजनीतिक दलों के दृष्टिकोण अलग-अलग हैं।
खेल सुविधाओं पर जोर देने की मांग
अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि खेल को केवल चुनावी प्रतीक तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने स्थानीय खिलाड़ियों के लिए मैदान, प्रशिक्षण केंद्र और आवश्यक संसाधनों के विस्तार पर जोर दिया। उनके अनुसार, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें उचित मंच देना खेल नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।
वहीं निर्वाचन आयोग के ताजा निर्णय के बाद तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों की चुनावी पहचान फिलहाल अलग हो गई है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने आयोग के निर्णय को उच्चतम न्यायालय में चुनौती भी दी है।
चुनावी बहस में खेल का मुद्दा
फुटबॉल खिलाड़ी चुनाव चिह्न मिलने के बाद खेल से जुड़ा विषय राजनीतिक विमर्श में प्रमुखता से उभरा है। अग्निमित्रा पॉल के बयान ने इस बहस को आसनसोल तक भी पहुंचा दिया है। एक ओर चुनाव चिह्न को लेकर राजनीतिक चर्चा जारी है, दूसरी ओर खेल प्रेमियों के बीच राज्य में फुटबॉल के बुनियादी ढांचे और युवा प्रतिभाओं के भविष्य पर चर्चा हो रही है।
फिलहाल राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। आने वाले उपचुनावों के दौरान फुटबॉल खिलाड़ी चुनाव चिह्न और उससे जुड़े राजनीतिक विमर्श पर बहस और तेज होने की संभावना है। इस बीच खेल सुविधाओं, स्थानीय प्रतिभाओं और प्रशिक्षण व्यवस्था को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी लोगों की नजर बनी हुई है।

















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