चित्तरंजन : मंगलवार को चित्तरंजन रेलनगरी के एक लंबे समय से बंद पड़े रेलवे आवास से मानव कंकाल मिलने के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बरामद कंकाल 59 वर्षीय रेलकर्मी प्रकाश चंद्र राउत राय का होने की आशंका जताई जा रही है। प्रकाश चंद्र वर्ष 2021 से लापता बताए जा रहे थे। हालांकि, कंकाल की पहचान और मृत्यु के कारण की आधिकारिक पुष्टि जांच तथा फॉरेंसिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
परिजनों के अनुसार, प्रकाश चंद्र वर्ष 2021 में अचानक लापता हो गए थे। काफी तलाश के बावजूद उनका पता नहीं चल सका। इसके बाद वर्ष 2023 में परिवार की ओर से उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। लंबे समय तक कोई जानकारी नहीं मिलने के कारण परिवार उनकी तलाश करता रहा।
बंद आवास में मिला सुराग
बताया गया कि संबंधित रेलवे आवास काफी समय से बंद पड़ा था। रेलवे को आवास वापस सौंपने की प्रक्रिया के तहत परिजनों ने इसी वर्ष अप्रैल में उसे खोला था। उस समय किसी मानव अवशेष के मिलने की जानकारी सामने नहीं आई थी।
सोमवार को प्रकाश चंद्र के भतीजे किसी कार्य से दोबारा उस आवास में पहुंचे। इसी दौरान पूजा वाले कमरे में उन्हें हड्डियों के कुछ टुकड़े दिखाई दिए। स्थिति देखकर उन्होंने तत्काल परिवार के अन्य सदस्यों को सूचना दी और पुलिस को मामले की जानकारी दी गई।
सूचना मिलते ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी कुल्टी तथा फॉरेंसिक दल को भी घटनास्थल पर बुलाया गया। फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने मौके का निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए। बरामद मानव अवशेषों को वैज्ञानिक जांच के लिए भेज दिया गया है।
मृत्यु की परिस्थितियों की जांच
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित व्यक्ति की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई। प्रारंभिक स्तर पर मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं है। पुलिस प्राकृतिक मृत्यु, आत्महत्या अथवा किसी अन्य परिस्थिति सहित विभिन्न संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रकाश चंद्र मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे। उनके पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव में रहने की भी चर्चा सामने आई है। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की ओर से किसी निष्कर्ष की जानकारी नहीं दी गई है। ऐसे में किसी भी संभावना को अंतिम मानना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।
अप्रैल में खुला था आवास, फिर क्यों नहीं मिला कंकाल?
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि अप्रैल में रेलवे आवास खोले जाने के बावजूद उस समय मानव अवशेष सामने क्यों नहीं आए। करीब पांच महीने बाद सोमवार को उसी आवास के पूजा कक्ष में हड्डियों के टुकड़े मिलने से यह सवाल और गंभीर हो गया है।
पुलिस अब यह भी जांच करेगी कि अप्रैल से अब तक आवास में किसी की आवाजाही हुई थी या नहीं तथा कंकाल वहां कितने समय से मौजूद था। घटनास्थल से मिले साक्ष्य और फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
फिलहाल पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। कंकाल की पहचान, मृत्यु का कारण और बंद आवास में उसके पहुंचने की परिस्थितियां स्पष्ट होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
















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