धसान प्रभावित क्षेत्रों के लिए उचित मुआवजा एवं पुनर्वास की मांग, केंदा में प्रदर्शन

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जामुड़िया : ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के केंदा क्षेत्र में धसान प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों द्वारा न्यू केंदा कोलियरी कार्यालय के समक्ष व्यापक विरोध प्रदर्शन किया गया। यह विरोध प्रदर्शन केंदा ग्राम बचाओ कमिटी के नेतृत्व में आयोजित हुआ, जिसमें ईसीएल प्रबंधन पर पुनर्वास सम्बंधी नीतियों के कार्यान्वयन में धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया।केंदा ग्राम बचाओ कमिटी के नायक एवं पश्चिम बंगाल ग्वाला समाज के राज्याध्यक्ष नयन गोप ने बताया कि दो दिन पूर्व ईसीएल प्रबंधन के साथ आयोजित बैठक में जिन मुद्दों पर सहमति बनी थी, प्रबंधन अब उन पर अमल से कतरा रहा है। उन्होंने कहा कि कोल इंडिया की 2012 की आरआर पॉलिसी के अनुसार धसान प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों को पुनर्वासित करना एवं उचित मुआवजा प्रदान करना प्रबंधन का दायित्व है। सरकार के नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के अनुसार, ग्रामीणों का सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरण सुनिश्चित किया जाना है

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बंगाल बाउरी समाज शिक्षा समिति के राज्य अध्यक्ष सीमांत बाउरी ने इस दौरान प्रबंधन से प्रभावित क्षेत्रों का डेमो सर्वे जल्द कराने की मांग की और कहा कि प्रबंधन के निरंतर टालमटोल से ग्रामीणों में असुरक्षा और अविश्वास की भावना उत्पन्न हो रही है। भुइया समाज उत्थान समिति के अध्यक्ष सिंटू भुइया ने यह भी कहा कि केंदा क्षेत्र का धसान प्रभावित क्षेत्र बेहद संवेदनशील एवं खतरनाक है। अतः किसी भी अप्रत्याशित घटना से पहले ईसीएल प्रबंधन को ग्रामीणों का उचित पुनर्वास सुनिश्चित करना होगा।

इस अवसर पर केंदा ग्राम बचाओ कमिटी के प्रमुख सदस्य सीमांत बाउरी, नयन गोप, सिंटू भुइया, आकाश बाउरी, तापस गोप समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।जामुड़िया। ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के केंदा क्षेत्र में धसान प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों द्वारा न्यू केंदा कोलियरी कार्यालय के समक्ष व्यापक विरोध प्रदर्शन किया गया। यह विरोध प्रदर्शन केंदा ग्राम बचाओ कमिटी के नेतृत्व में आयोजित हुआ, जिसमें ईसीएल प्रबंधन पर पुनर्वास सम्बंधी नीतियों के कार्यान्वयन में धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया।

केंदा ग्राम बचाओ कमिटी के नायक एवं पश्चिम बंगाल ग्वाला समाज के राज्याध्यक्ष नयन गोप ने बताया कि दो दिन पूर्व ईसीएल प्रबंधन के साथ आयोजित बैठक में जिन मुद्दों पर सहमति बनी थी, प्रबंधन अब उन पर अमल से कतरा रहा है। उन्होंने कहा कि कोल इंडिया की 2012 की आरआर पॉलिसी के अनुसार धसान प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों को पुनर्वासित करना एवं उचित मुआवजा प्रदान करना प्रबंधन का दायित्व है। सरकार के नए भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के अनुसार, ग्रामीणों का सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

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पश्चिम बंगाल बाउरी समाज शिक्षा समिति के राज्य अध्यक्ष सीमांत बाउरी ने इस दौरान प्रबंधन से प्रभावित क्षेत्रों का डेमो सर्वे जल्द कराने की मांग की और कहा कि प्रबंधन के निरंतर टालमटोल से ग्रामीणों में असुरक्षा और अविश्वास की भावना उत्पन्न हो रही है। भुइया समाज उत्थान समिति के अध्यक्ष सिंटू भुइया ने यह भी कहा कि केंदा क्षेत्र का धसान प्रभावित क्षेत्र बेहद संवेदनशील एवं खतरनाक है। अतः किसी भी अप्रत्याशित घटना से पहले ईसीएल प्रबंधन को ग्रामीणों का उचित पुनर्वास सुनिश्चित करना होगा।

इस अवसर पर केंदा ग्राम बचाओ कमिटी के प्रमुख सदस्य सीमांत बाउरी, नयन गोप, सिंटू भुइया, आकाश बाउरी, तापस गोप समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थिति थे।

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