

आसनसोल : परंपराओं की अमूल्य थाती को जीवित रखता आसनसोल गांव इस वर्ष भी नौ पारंपरिक दुर्गा पूजाओं का आयोजन कर रहा है, जो 293 वर्षों की अविरल आस्था का प्रतीक है। रीतिगत और सांस्कृतिक धारा में रचे बसे इस आयोजन में सभी नौ पूजाओं की नवपत्रिकाएं एक साथ स्नान कराई जाती हैं और रामसायर तालाब से इन नवपत्रिकाओं को मंगाकर हर मंदिर में स्थापित किया जाता है। दशमी के दिन पारंपरिक सिन्दूर खेला का आयोजन होता है जिसमें महिलाओं का उल्लास देखते ही बनता है।

पूजा कमिटी और श्री श्री नीलकंठेश्वर देवोत्तार ट्रस्ट के अध्यक्ष शचीन राय ने बताया कि इस पूजा में पारंपरिक मूर्तिकला और सांस्कृतिक सौंदर्य को संजोया गया है, जिससे यह आयोजन एक पुरातन धरोहर की तरह प्रतीत होता है। केवल दो पूजा मंडलों में बलि की प्रथा कायम है, जबकि अन्य स्थानों पर यह परंपरा अब समाप्तप्राय है। विसर्जन के अवसर पर आतिशबाजी का प्रदर्शन भी होता है, जिसमें जनसमुदाय की उमड़ती भीड़ उस अद्भुत दृश्य को अपनी आंखों में कैद करने में मग्न रहती है।
सचिन राय के अनुसार, यह पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, अपितु सामाजिक एकता का प्रतीक है। लगभग दस हजार से अधिक राय परिवार के सदस्य तथा गांव के वासी इस आयोजन का भाग बनते हैं और प्राचीन परंपराओं के सम्मान में संपूर्ण ग्रामवासी उत्सव का आनंद लेते हैं।















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