आसनसोल में बिस्वा बांग्ला शरद सम्मान समारोह: सांस्कृतिक गरिमा का सम्मान

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आसनसोल : बिस्वा बांग्ला शरद सम्मान समारोह का आयोजन स्थानीय सांस्कृतिक विधाओं की सुदृढ़ परंपरा को प्रोत्साहित करते हुए शहर में उत्साह के साथ किया गया। इस आयोजन में दुर्गा पूजा की उत्कृष्टता को सम्मानित करने के उद्देश्य से विभिन्न पूजा समितियों को पुरस्कृत किया गया, जिससे बंगाल की सांस्कृतिक गौरव का प्रदर्शन हुआ। जिला अधिकारी (डीएम) श्री एस. पन्नाबलम ने 9 से अधिक पूजा समितियों को उनके विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया और उन्हें पुरस्कृत कर उनकी कला और नवाचार को सराहा।

समारोह की महत्ता और आयोजन

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इस सम्मान समारोह का मुख्य उद्देश्य उन पूजा पंडालों को प्रोत्साहन देना है, जिन्होंने अनोखे और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से समृद्ध पंडालों का निर्माण किया, जो बंगाल की पारंपरिक कला का संरक्षण करते हैं और इसे नए युग के अनुरूप विकसित करते हैं। इस अवसर पर जिला अधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर को सहेजते हैं, बल्कि समुदाय में एकता और सामाजिक समरसता की भावना को भी प्रबल करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से बंगाल की सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलती है।

पुरस्कृत समितियों की सूची और उनके प्रयास

 

IMG 20240910 WA0035इस वर्ष के बिस्वा बांग्ला शरद सम्मान समारोह में, पश्चिम बर्धमान जिले के विभिन्न पूजा समितियों को उनके अद्वितीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

सेरा पूजा: चतुरंगा पूजा समिति (दुर्गापुर), अपकार गार्डन दुर्गा पूजा समिति (आसनसोल), राधानगर रोड एथलेटिक क्लब (आसनसोल)।

सेरा प्रतिमा: अग्रणी सांस्कृतिक परिषद (दुर्गापुर), कल्याणपुर आदि पूजा (आसनसोल), नबारून क्लब (दुर्गापुर)।

सेरा मंडप: मारकोनी दक्षिणपाली सार्वजानिन दुर्गा पूजा समिति (दुर्गापुर), एरिया-6 सार्वजानिन दुर्गा पूजा समिति (चित्तरंजन), बुद्ध बिहार सार्वजानिन दुर्गोत्सव सम्मिलनी (आसनसोल)।

सेरा समाज सचेतनता: गोपालपुर यूनाइटेड क्लब (आसनसोल), राजबाड़ी मोड़ सार्वजानिन दुर्गोत्सव (आसनसोल), दुमुर्तला सार्वजानिन दुर्गापूजा (दुर्गापुर)।

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सांस्कृतिक नवाचार और परंपराओं का मिश्रण

पुरस्कार वितरण के दौरान विभिन्न पूजा समितियों के अनूठे प्रयासों को सराहा गया, जिसमें उनके द्वारा प्रदर्शित पारंपरिक मूर्तिशिल्प, पंडाल सज्जा की उत्कृष्टता, और पर्यावरण-संवेदनशील विषयों पर आधारित नवीनतम विचारों का सम्मिश्रण देखा गया। इन पंडालों में भारतीय संस्कृति के विभिन्न रंगों का जीवंत प्रदर्शन हुआ, जो न केवल आगंतुकों को आकर्षित कर रहे हैं, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति और बंगाल की समृद्ध परंपरा का परिचय भी करा रहे हैं।

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समाज के लिए प्रेरणा

इस समारोह में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने भी इस आयोजन की सराहना की और इसे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया। इस प्रकार के आयोजन न केवल कला और संस्कृति के प्रति समर्पण को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम भी बनते हैं।

 

इस प्रकार के आयोजन सांस्कृतिक चेतना को सशक्त बनाते हैं और समाज में सामूहिक एकता और समरसता का भाव पैदा करते हैं।

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