
आसनसोल: खनन कार्य के दौरान होने वाली आकस्मिक आपदाओं से निपटना और खनिज कर्मियों को संकट से सुरक्षित बाहर निकालना खनिज उद्योग में एक महत्त्वपूर्ण और अपरिहार्य दायित्व माना जाता है। इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु खनिज कर्मियों को आपदा प्रबंधन के प्राथमिक शिक्षण की अनिवार्यता पर बल दिया जाता है। इसी कड़ी में, पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) द्वारा वर्ष 2024 के लिए सतरामपुर स्थित माइन रेस्क्यू स्टेशन में 23-24 अक्टूबर को आपातकालीन प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धा का भव्य आयोजन किया गया।

इस महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम का पहला दिन मेनधेमो कोलियरी में आयोजित रेस्क्यू प्रतिस्पर्धा के नाम रहा, जिसमें ईसीएल के मुख्यालय (सांक्तोरिया), सोदपुर, मुगमा, श्रीपुर, सातग्राम, कुंस्तोरिया, बांकोला, केंदा, पांडवेश्वर, झांझरा, सोनपुर बाज़ारी और काजोड़ा जैसे 11 खनिज क्षेत्रों से आए कर्मियों ने हिस्सा लिया। प्रतिस्पर्धा में भाग लेने वाले खनिज कर्मियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए प्रधान न्यायाधीश इरफान अहमद अंसारी की अध्यक्षता में 12 अनुभवी निर्णायक मंडल के सदस्य उपस्थित रहे।
दूसरे दिन आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में ईसीएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) समीरन दत्ता, उप महानिदेशक (डीडीज़ी) श्यामसुंदर प्रसाद, महोम्मद अंजार आलम (डीएफ), नीलाद्री राय (डीटी ऑपरेशन्स), विनोद रजक (डीएमएस क्षेत्रीय 2), एवं महाप्रबंधक (जीएम) रेस्क्यू बिनेश शर्मा सहित ईसीएल के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे। इस अवसर पर आयोजित मार्चपास्ट एवं ड्रिल प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर काजोड़ा क्षेत्र, द्वितीय स्थान पर बांकोला क्षेत्र, एवं तृतीय स्थान पर सोनपुर बाज़ारी क्षेत्र रहा।

कार्यक्रम में 25 वर्षों से अधिक समय तक कर्मियों को आपातकालीन रेस्क्यू का प्रशिक्षण देने वाले 9 वरिष्ठ प्रशिक्षकों को विशेष पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त, सैद्धांतिक परीक्षा, प्राथमिक चिकित्सा (फर्स्ट एड) एवं रिले रेस के तहत भी खनिज कर्मियों को पुरस्कृत किया गया।
इस भव्य आयोजन की शोभा बढ़ाने हेतु सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें ओडिसी, भरतनाट्यम एवं अन्य पारंपरिक नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मनमोह लिया। समारोह की गरिमा एवं अनुशासन ने दर्शाया कि ईसीएल अपने कर्मियों के सुरक्षा प्रशिक्षण के प्रति संजीदगी एवं प्रतिबद्धता में कोई कमी नहीं छोड़ती है।
संपूर्ण आयोजन का उद्देश्य यह संदेश देना था कि खनिज कार्य केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि उसमें निहित खतरों के प्रति सतर्कता एवं संजीवनी का भी निरंतर पोषण आवश्यक है। इस प्रकार, ईसीएल का यह अभिनव प्रयास खनिज कर्मियों के कौशल संवर्द्धन एवं उनके मनोबल में वृद्धि करने की दिशा में एक प्रशंसनीय पहल मानी जाएगी।















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