
आसनसोल : प्रसिद्ध लोक गायिका और पद्म श्री तथा पद्म भूषण से सम्मानित शारदा सिन्हा अब हमारे बीच नहीं रहीं। मंगलवार, 5 नवम्बर को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में उनका निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से गंभीर रूप से बीमार चल रही थीं और 4 नवम्बर को उनकी तबियत और बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। 5 नवम्बर को दुखद समाचार सामने आया, जिससे संगीत जगत और उनके चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गई।

शारदा सिन्हा, जिन्हें बिहार कोकिला के नाम से जाना जाता था, का निधन संगीत के क्षेत्र में एक अपूरणीय क्षति के रूप में सामने आया है। उन्होंने मैथिली, भोजपुरी, बज्जिका तथा हिंदी भाषा में अनेक भक्ति और लोक गीत गाए थे। उनके गीतों में खासकर छठ महापर्व के दौरान एक विशेष श्रद्धा और रसपूर्णता का समावेश था, जो बिहार, उत्तर प्रदेश समेत पूरे देशभर में गूंजते थे। उनकी मधुर आवाज़ आज भी लोगों के दिलों में जीवित रहेगी। उनके गायन से न केवल बिहार का लोक संगीत समृद्ध हुआ, बल्कि उन्होंने भारतीय लोक संगीत को भी एक नया आयाम दिया।

आसनसोल के शिल्पांचल क्षेत्र के समाजसेवी, व्यवसायी और विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी शारदा सिन्हा को श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे। आसनसोल चेंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव शंभूनाथ झा, व्यवसायी पप्पू सिंह, पिंटू राय, पश्चिम बर्दवान जिला तृणमूल कांग्रेस के सचिव चंकी सिंह, शशि पांडेय, भाजपा नेता प्रदीप सिंह, संजय सिंह, प्रमोद सिंह समेत शिल्पांचल के सैकड़ों लोग इस दुख की घड़ी में उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
कृष्णा प्रसाद सहित शिल्पांचल के विभिन्न समाजसेवियों ने शारदा सिन्हा के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनका संगीत बिहार और उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा था। उन्होंने अपनी आवाज से न केवल भोजपुरी और मैथिली संगीत की धारा को स्थापित किया, बल्कि अपनी गायकी के जरिए भारतीय लोक संगीत को भी विश्वभर में पहचान दिलाई।
उनके निधन से एक युग का समापन हुआ है, लेकिन उनकी मधुर आवाज़ और संगीत हमेशा जीवित रहेगा। श्रद्धांजलि के इस अवसर पर सभी ने ईश्वर से प्रार्थना की कि वह शारदा सिन्हा की आत्मा को शांति और उनके परिजनों को इस गहरे दुःख में सहनशीलता प्रदान करें।















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