
आसनसोल : बंगाली भाषा के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी करने और विवादित बयान देने के बाद युवक को अंततः अपनी गलती स्वीकार कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी। यह घटना 12 नवंबर को चित्तरंजन के हिंदुस्तान केबल्स हाई स्कूल मैदान में आयोजित मेले के दौरान हुई थी, जहां साइकिल और वाहन स्टैंड पर खड़े एक युवक ने बंगाली भाषा में बात करने वाले व्यक्ति से कहा कि बंगाल में रहते हुए भी यहां बंगाली में बात नहीं की जा सकती।
युवक ने धमकी भरे लहजे में कहा कि यदि बंगाली भाषा में बात करनी है तो “बांग्लादेश जाना होगा”। युवक की पहचान यश यादव के रूप में हुई, जो स्वयं को हिंदी भाषी बताते हुए दावा कर रहा था कि “यह हिंदुस्तान है, यहां हिंदी बोलनी होगी”। इस बयान से नाराज “बांग्ला पक्ष” संगठन ने विरोध जताते हुए युवक को सार्वजनिक माफी मांगने के लिए मजबूर किया।

घटना के बाद बांग्ला पक्ष के प्रतिनिधि 15 नवंबर को रानीगंज के जोड़बाड़ी क्षेत्र स्थित आरोपी युवक के घर पहुंचे। पहले युवक के परिवार ने उसे अपना रिश्तेदार बताते हुए बचाने की कोशिश की, लेकिन दबाव के चलते उसे सामने लाया गया। संगठन के बाराबनी विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी नीलांजन सरकार ने इसे बंगाल की भाषा, संस्कृति और परंपरा पर सीधा हमला बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बंगाल की धरती पर बांग्ला भाषा का अपमान किसी भी स्थिति में सहन नहीं किया जाएगा।
इस घटना को लेकर बांग्ला पक्ष रूपनारायणपुर के डाबर मोड़ पर विरोध सभा का आयोजन किया, जिसमें बाराबनी, सलानपुर, कुल्टी, आसनसोल और दुर्गापुर के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभा के बाद संगठन ने मेला स्थल से मुनादी कराते हुए आरोपी युवक के घर तक विरोध मार्च निकाला।

उल्लेखनीय है कि घटना के तुरंत बाद सोशल मीडिया और “प्रांतीय भूमि” ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर खबर वायरल हुई। इसके बाद, रूपनारायणपुर थाना प्रभारी नासरीन सुल्ताना ने आरोपी युवक को पूछताछ के लिए थाने बुलाया। युवक द्वारा माफी मांगने और विरोध प्रदर्शन समाप्त होने के बाद बांग्ला पक्ष के प्रतिनिधियों ने थाना प्रभारी को पुष्पगुच्छ देकर धन्यवाद दिया और उनकी कार्रवाई की सराहना की।
बांग्ला पक्ष ने स्पष्ट किया कि बंगाल की भाषा और संस्कृति पर किसी भी प्रकार के हमले का वह पुरजोर विरोध करेगा और दोषियों को माफी मांगने पर मजबूर करेगा।















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