
रानीगंज : राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का संकट चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन रानीगंज में भी स्थिति धीरे-धीरे गंभीर होती जा रही है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के अनुसार, रानीगंज का एक्यूआई 200 से अधिक पहुंच गया है, जो हवा में प्रदूषण की मात्रा को खतरनाक स्तर पर दर्शाता है। बावजूद इसके, इस गंभीर मुद्दे पर संबंधित प्राधिकरण और प्रशासन का ध्यान अपेक्षित रूप से नहीं जा रहा।

पूर्व मेयर एवं भाजपा नेता जितेंद्र तिवारी ने पहले ही इस समस्या पर चिंता जताई थी और सोशल मीडिया के माध्यम से राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए औद्योगिक घरानों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की थी। अब तृणमूल कांग्रेस विधायक तापस बनर्जी ने भी इस विषय को गंभीरता से उठाया है। उन्होंने पश्चिम बर्दवान जिले के डीएम को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया और तत्काल आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
विधायक बनर्जी ने अपने पत्र में लिखा है कि औद्योगिक क्षेत्र में स्थित कुछ स्पंज आयरन इकाइयां वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों का उपयोग सही तरीके से नहीं कर रही हैं। इससे प्रदूषित गैस का अत्यधिक उत्सर्जन हो रहा है, जिससे वायु गुणवत्ता खराब हो रही है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस प्रदूषण के कारण स्थानीय निवासियों, विशेषकर बुजुर्गों और बच्चों, को सांस लेने में कठिनाई और अन्य श्वसन संबंधी समस्याएं हो रही हैं।

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 24 नवंबर की रात 11:48 बजे रानीगंज का एक्यूआई 255 दर्ज किया गया था, जबकि 25 नवंबर की तड़के 12:45 बजे यह 201 था। यह लगातार खतरनाक स्थिति की ओर इशारा करता है।
भाजपा नेता जितेंद्र तिवारी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि औद्योगिक घराने “साइलेंट किलर” की तरह काम कर रहे हैं और इनके खिलाफ कार्रवाई करने वाला कोई नहीं है। वहीं, पूर्व पार्षद आरिज जलीस ने आरोप लगाया कि बिजली बचाने के लिए कई उद्योग रात में प्रदूषण नियंत्रण उपकरण बंद कर देते हैं, जिससे रात के समय प्रदूषण और बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, एक्यूआई 200 से अधिक होने का मतलब है कि हवा की गुणवत्ता “खराब” श्रेणी में आ चुकी है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। प्रशासन और उद्योगों को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि स्थिति और गंभीर न हो।















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