
आसनसोल : विपरीत परिस्थितियों में हार न मानने की मिसाल बने डीएवी मॉडल स्कूल के छात्र सरत प्रियदर्शी ने माध्यमिक परीक्षा में 86% अंक प्राप्त कर यह सिद्ध कर दिया कि हौसला हो तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। वार्ड संख्या 85 मोहिशीला बोदी पाड़ा निवासी सरत शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी रहे हैं। परीक्षा से कुछ महीने पहले ही चेली डंगाल स्थित एक कोचिंग संस्थान में पढ़ाई के दौरान नंगे बिजली के तार की चपेट में आ जाने से उनका दाहिना हाथ बुरी तरह जल गया।

इस हादसे के बाद उनके पिता संजीव प्रियदर्शी उन्हें इलाज हेतु चेन्नई स्थित वेलोर अपोलो अस्पताल ले गए, जहां कई महीनों तक उपचार चला। इस दौरान कोचिंग संचालक ने इलाज में सहयोग देने से मना कर दिया। पांच महीनों की कठिन चिकित्सा प्रक्रिया, कई ऑपरेशनों और आर्थिक संकटों के बीच सरत ने जीवन और शिक्षा की दोहरी परीक्षा दी।

इलाज के दौरान ही सरत ने बोर्ड परीक्षा दी और 90% के लक्ष्य से थोड़ा पीछे रहकर भी 86% अंक प्राप्त किए। यह उनके साहस, आत्मबल और माता-पिता के सहयोग की परिणति है। उनकी इस उपलब्धि से स्कूल प्रशासन, शिक्षकगण और मोहल्लेवासी बेहद गर्वित हैं। स्कूल के प्राचार्य ने सरत को अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा बताया है।

सरत अब आईआईटी और जेईई की तैयारी में जुटे हैं। उनका सपना एक श्रेष्ठ इंजीनियर बनना है। उन्होंने कहा, “मैंने मौत को करीब से देखा, लेकिन हार नहीं मानी। मेरे माता-पिता मेरे साथ खड़े रहे, यही मेरी ताकत है।”
यह घटना न केवल प्रेरणास्रोत है, बल्कि कोचिंग सेंटरों की लापरवाही पर भी गंभीर प्रश्न उठाती है। सरत के पिता ने प्रशासन से कोचिंग संस्थानों की सख्त निगरानी और कार्रवाई की मांग की है। सरत की कहानी बताती है कि परिस्थितियाँ चाहे जितनी कठिन क्यों न हों, सच्ची लगन और पारिवारिक समर्थन से हर लक्ष्य संभव है।














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