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रोजगार पोर्टल पर सियासत गरम, तृणमूल श्रमिक संगठन में बढ़ी अंदरूनी कलह

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दुर्गापुर :  राज्य में तृणमूल श्रमिक संगठन के भीतर इन दिनों आंतरिक मतभेद और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इसका कारण है हाल ही में राज्य सरकार द्वारा शुरू किया गया रोजगार पोर्टल, जिसे लेकर संगठन के कुछ वर्गों में विरोध और असंतोष की स्थिति बनी हुई है। गुरुवार को दुर्गापुर के सिधु-कान्हू इंडोर स्टेडियम में आयोजित एक अहम बैठक में संगठन के राज्य अध्यक्ष ऋतब्रत बंद्योपाध्याय ने इस मुद्दे को लेकर स्पष्ट शब्दों में अपनी बात रखी।

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ऋतब्रत ने कहा, “जब रोजगार पोर्टल शुरू किया गया, तब तृणमूल के ही कुछ लोग झंडा लेकर इसका विरोध करने लगे। इसका मतलब है कि हमारा वार सही जगह पर लगा।” उन्होंने इशारों में उन लोगों को निशाने पर लिया, जो पोर्टल के माध्यम से होने वाली पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया से असहज महसूस कर रहे हैं।

इस बैठक में दुर्गापुर के नवगठित कोर कमिटी के सदस्यों के साथ विधायक नरेन्द्रनाथ चक्रवर्ती भी मौजूद रहे। ऋतब्रत ने कहा कि अब से श्रमिक संगठन की पूरी जिम्मेदारी कोर कमिटी के हाथों में होगी और हर महीने तीन बार नियमित बैठकें कर श्रमिकों की समस्याएं और उनके अधिकारों पर चर्चा की जाएगी।

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उन्होंने कहा कि अब श्रमिक संगठन किसी फैक्ट्री के प्रबंधन में दखल नहीं देगा, बल्कि कामकाज को सुचारु बनाए रखने में मदद करेगा। सभी नियुक्तियां सिर्फ रोजगार पोर्टल के जरिए होंगी और यदि कोर कमिटी का कोई सदस्य किसी प्रकार का अवैध दबाव बनाता है, तो संबंधित फैक्ट्री उसे सीधे उनके पास रिपोर्ट कर सकती है।

हालांकि कोर कमिटी में शामिल कुछ सदस्यों के खिलाफ यह आरोप भी सामने आया है कि वे खुद ठेकेदारी से जुड़े हुए हैं, जिससे हितों का टकराव हो सकता है। इस पर ऋतब्रत ने कहा, “अगर मेरे पास कोई ठोस शिकायत आती है, तो उसके आधार पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। हम एक हेल्पलाइन नंबर भी दे रहे हैं, जिस पर कोई भी व्यक्ति गोपनीय रूप से शिकायत कर सकता है।”

लेकिन इस पूरी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष भी सक्रिय हो गया है। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष देवेश चक्रवर्ती ने तंज कसते हुए कहा, “पहले दो-तीन लोग ठेकेदारों से पैसा वसूलते थे, अब 11 लोगों की टीम ऐसा करेगी। इससे दुर्गापुर के बेरोजगार युवाओं और श्रमिकों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आएगा।”

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दुर्गापुर जैसे औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिक संगठन की भूमिका बेहद अहम है। ऐसे में इस नई व्यवस्था और पारदर्शिता लाने के प्रयास को जहां संगठन का एक तबका सराहनीय मान रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे अपने प्रभाव में कटौती के तौर पर देख रहा है।

साफ है कि रोजगार पोर्टल के जरिए नियुक्तियों में पारदर्शिता लाने की पहल ने तृणमूल श्रमिक संगठन के अंदर ही एक नई बहस और संघर्ष की नींव रख दी है। अब देखना होगा कि ऋतब्रत की यह रणनीति संगठन को एकजुट कर पाती है या मतभेद और गहरा होते हैं।

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