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ईसीएल डिपो में असल-नकल कोयला खेल फिर सक्रिय

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आसनसोल :  शिल्पांचल में कोयले की चोरी और अवैध कारोबार कोई नई बात नहीं है, लेकिन एक बार फिर ‘असल-नकल’ के खेल ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के सातग्राम-श्रीपुर क्षेत्र से जुड़ा है, जहां वैध डंपरों से कोयला लाकर अवैध रूप से अदला-बदली कर ईसीएल के वैध डिपो में बैंड पत्थर और मिट्टी गिराए जाने का खुलासा हुआ है।

शुक्रवार की संध्या इस अवैध गतिविधि का पर्दाफाश तब हुआ जब एक डंपर को सेंट्रल डिपो में कोयला खाली करने से रोक दिया गया। डंपर में कोयले की जगह बैंड पत्थर और मिट्टी पाई गई। अधिकारियों ने पाया कि डंपर का जीपीएस लगभग 40 से 45 मिनट तक बंद था, जिससे शक और गहरा हो गया। तत्पश्चात, डंपर की गहन जांच की गई और मामले की शिकायत शनिवार को श्रीपुर फाड़ी में दर्ज कराई गई।

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जानकारी के अनुसार, यह कोई नई रणनीति नहीं है। वर्ष 2024 में सातग्राम-श्रीपुर एरिया के पूर्व महाप्रबंधक (जीएम) के कार्यकाल में इस प्रकार का धंधा बड़े पैमाने पर चल रहा था। तब भी एक अभियान में ऐसे छह डंपर पकड़े गए थे, जिनमें बैंड पत्थर लादकर ईसीएल डिपो में गिराने की कोशिश की गई थी। उस वक्त की कार्रवाई के बाद यह अवैध काम कुछ समय के लिए थम गया था।

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सूत्रों के अनुसार, जामुड़िया थाना अंतर्गत शिवडांगा ओपन कास्ट प्रोजेक्ट (ओसीपी) से कोयला लादकर एक वैध डंपर निकला था। लेकिन रानीसायर ब्रिज के पास पहले से मौजूद नकली डंपर में बैंड पत्थर लदा हुआ था। असल डंपर से जीपीएस निकालकर उसे नकल डंपर में फिट कर दिया गया और असली कोयला अवैध डिपो में उतार दिया गया। इसके बाद नकली डंपर को वैध सेंट्रल डिपो में ले जाकर असल डंपर की तरह प्रस्तुत किया गया।

यह खेल सुनियोजित और तकनीकी तरीके से अंजाम दिया जाता है। क्योंकि ईसीएल के सभी डंपरों में जीपीएस प्रणाली लगी होती है, इसलिए जीपीएस को अस्थायी रूप से निकाल कर नकल डंपर में लगाया जाता है ताकि ट्रैकिंग में गड़बड़ी न आए। लेकिन अधिकारियों की सजगता और संदेह के चलते शुक्रवार को यह धांधली पकड़ में आ गई।

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पुनः सक्रिय होते इस अवैध कोयला सिंडिकेट को लेकर इलाके में चर्चा तेज है। आम लोग, खासकर स्थानीय कोयला मजदूरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या नए महाप्रबंधक के आने के बावजूद पूर्व की तरह यह कोयला लूट का खेल चलता रहेगा, या इस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे मामले ने ईसीएल के सुरक्षा प्रबंधनों और प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि इतने संवेदनशील डिपो में बैंड पत्थर और मिट्टी को एक नंबर कोयला बताकर गिराया जा सकता है, तो यह न केवल आर्थिक नुकसान का प्रश्न है, बल्कि यह कोलफील्ड्स की साख पर भी एक गंभीर धब्बा है।

प्रबंधन द्वारा की गई त्वरित शिकायत से उम्मीद जगी है कि आगे जांच तेज होगी और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सवाल यही है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ एक घटना तक सीमित रहेगी, या वास्तव में कोयला माफियाओं की इस सुनियोजित चोरी पर स्थायी अंकुश लगाया जाएगा। क्षेत्रवासियों की नजरें अब ईसीएल प्रबंधन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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