
बर्नपुर : पश्चिम बर्धमान जिले के हीरापुर अंतर्गत बर्नपुर क्षेत्र में दामोदर नदी पर पक्का पुल निर्माण की पुरानी मांग को लेकर शनिवार को दामोदर बिहारीनाथ सेतु बंधन कमेटी द्वारा जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। यह आंदोलन बर्नपुर-आसनसोल और बांकुड़ा जिले को आपस में जोड़ने वाले पुल की आवश्यकता को लेकर किया गया।
कमेटी के अध्यक्ष सुबल चक्रवर्ती ने बताया कि इस क्षेत्र में दशकों से लोग बरसात और गर्मी दोनों मौसमों में नदी पार करने के लिए अस्थायी बांस के पुल का उपयोग करते आ रहे हैं। सितंबर से जून तक यह पुल कार्य करता है, लेकिन जुलाई में बरसात शुरू होते ही नदी की धारा इसे बहा ले जाती है। इसके बाद ग्रामीणों को मजबूरीवश या तो जोखिम भरे रेलवे पुल से गुजरना पड़ता है या लंबा घुमावदार रास्ता अपनाना पड़ता है, जिससे दैनिक यात्रा में कठिनाई होती है।

सुबल चक्रवर्ती ने बताया कि वह स्वयं बचपन में गले तक पानी में चलकर बर्नपुर के स्कूल जाते थे। आज दशकों बाद भी वह स्थिति जस की तस बनी हुई है। उन्होंने बताया कि बांकुड़ा जिले के किसानों को बरसात के मौसम में नाव से अपनी फसल बर्नपुर के बाजारों में ले जानी पड़ती है, जिससे फसल की गुणवत्ता खराब हो जाती है।
इस्पात संयंत्र (इस्को) के अनुबंधित मजदूर जो बांकुड़ा की ओर से आते हैं, उन्हें भी समय पर कार्यस्थल पहुंचने में परेशानी होती है।
कमेटी के सचिव चंदन मिश्रा ने कहा कि इस पुल का निर्माण केवल एक आवागमन की सुविधा भर नहीं होगा, बल्कि यह सांस्कृतिक, कृषि, व्यवसाय, चिकित्सा और पर्यटन क्षेत्र में भी नया आयाम जोड़ देगा। उन्होंने कहा कि जैसे सरकार ने पहले मेजिया और डिसेरगढ़ में पुल का निर्माण कर लोगों को राहत दी थी, वैसे ही यहां भी ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

कमेटी ने बताया कि इस विषय पर राज्य मंत्री मलय घटक ने पूर्व में सर्वेक्षण करवाया था, लेकिन उसके बाद कार्यवाही नहीं हुई। ग्रामीणों ने प्रशासनिक और राजनीतिक स्तरों पर कई बार पत्राचार किया, लेकिन आज तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।
ग्रामीणों ने आशंका व्यक्त की कि बरसात में नदी के जलस्तर में वृद्धि से जब उनके बच्चे नाव से स्कूल या कॉलेज जाते हैं, तो उनके जीवन को खतरा बना रहता है। ऐसे में पक्का पुल इस पूरे क्षेत्र के लिए जीवनरेखा साबित होगा।
कमेटी ने एक बार फिर प्रशासन से मांग की है कि दामोदर नदी पर पक्का पुल निर्माण को प्राथमिकता देते हुए तुरंत पहल की जाए, जिससे लाखों लोगों को राहत मिल सके और क्षेत्रीय विकास को गति मिले।














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