
आसनसोल : पश्चिम बर्धमान जिले के आसनसोल नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत काली पहाड़ी इलाके में उस समय भारी असंतोष और तनाव का माहौल उत्पन्न हो गया, जब नगर निगम के नाम अंकित एक ट्रैक्टर में कटे हुए मवेशियों के अवशेष लेकर डंपिंग ग्राउंड में फेंकने के लिए लाया गया। यह घटना शनिवार देर रात की है, जब आसपास के स्थानीय लोगों ने ट्रैक्टर को आते हुए देखा और संदेह के आधार पर उसे रोक लिया।
ट्रैक्टर की तलाशी लेने पर लोगों ने पाया कि उसमें मवेशियों के शरीर के कटे हुए अंग और बचे हुए हिस्से खुले रूप में लादे गए थे, जिसे डंपिंग ग्राउंड में फेंकने का प्रयास किया जा रहा था। यह दृश्य देखकर स्थानीय नागरिकों में गहरा आक्रोश और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने जैसी भावना उत्पन्न हो गई। लोगों ने इस कार्य को अनैतिक, असंवेदनशील और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक करार देते हुए विरोध जताया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें किसी के त्योहार मनाने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इस प्रकार से रात के अंधेरे में सार्वजनिक स्थान पर कटे मवेशियों के अवशेष फेंकना निंदनीय है। यह न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करता है, बल्कि इससे पर्यावरण और आसपास के स्वास्थ्य पर भी दुष्प्रभाव पड़ सकता है। नागरिकों ने आरोप लगाया कि नगर निगम द्वारा इस तरह के कार्य को छुपाकर करना अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना है।

घटना की जानकारी मिलने पर आसनसोल उत्तर थाना की पुलिस तत्काल मौके पर पहुँची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिस ने ट्रैक्टर को कब्जे में लेकर मामले की जाँच प्रारंभ कर दी है।

इस विषय पर जब आसनसोल दक्षिण विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती अग्निमित्रा पाल से प्रतिक्रिया माँगी गई, तो उन्होंने कहा कि, “भारत एक बहुधार्मिक देश है, और यहाँ हर व्यक्ति को अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार त्योहार मनाने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। लेकिन किसी भी समाज या समुदाय को यह ध्यान रखना चाहिए कि उनकी धार्मिक गतिविधियाँ दूसरे समुदाय की धार्मिक भावना को आहत न करें।”
उन्होंने आगे कहा, “यदि नगर निगम का ट्रैक्टर इस प्रक्रिया में सम्मिलित पाया जाता है, तो यह अत्यंत गंभीर और संवेदनशील विषय है। पुलिस को चाहिए कि वह संपूर्ण जांच अत्यंत निष्पक्षता और संवेदनशीलता से करे तथा ऐसा कोई कार्य न होने दे, जिससे समाज में धार्मिक तनाव या साम्प्रदायिक विषमता उत्पन्न हो।”
इस घटना के बाद काली पहाड़ी क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से माँग की है कि डंपिंग ग्राउंड में इस प्रकार के धार्मिक रूप से संवेदनशील जैविक अवशेष लाने और फेंकने की प्रक्रिया पर पूर्ण रोक लगाई जाए। साथ ही उन्होंने नगर निगम पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या इस प्रकार की सामग्री को हटाने के लिए सुरक्षित और वैज्ञानिक पद्धति नहीं अपनाई जा सकती थी?

उधर, नगर निगम के अधिकारियों ने इस संबंध में कोई स्पष्ट वक्तव्य नहीं दिया है। नगर निगम के एक कर्मचारी ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि ट्रैक्टर चालक को यह निर्देश नहीं था कि वह ऐसे अवशेष खुले रूप में डंपिंग ग्राउंड में फेंके। इस पर जांच के बाद ही कुछ स्पष्ट हो पाएगा।
स्थानीय समाजसेवी संगठनों और बुद्धिजीवियों ने भी प्रशासन से अपील की है कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाए और भविष्य में धार्मिक, सामाजिक और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए सभी निर्णय लिए जाएँ। यह घटना नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि इस घटना की गहन जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल क्षेत्र में पुलिस तैनात कर दी गई है ताकि कानून व्यवस्था बनाए रखी जा सके।














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