
आसनसोल : पश्चिम बर्दवान जिले में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर चौंकाने वाली ठगी को अंजाम दिया है। इस बार शिकार बने हैं आसनसोल नगर निगम के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी सुकुमार डे, जिनसे 1 करोड़ 65 लाख रुपये की ठगी की गई। यह अब तक आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र का सबसे बड़ा मनी लॉन्ड्रिंग मामला माना जा रहा है।
साइबर ठगों ने पुराने लेकिन कारगर हथकंडे अपनाते हुए 32 दिनों तक मानसिक दबाव में रखकर उनसे यह रकम वसूली। पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 9 मई को हुई, जब सुकुमार डे के मोबाइल पर एक अज्ञात कॉल आया, जिसने खुद को बीएसएनएल अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि सुकुमार के आधार नंबर से मुंबई में अवैध सिम कार्ड लिया गया है।
इसके बाद, एक और कॉल आया – इस बार खुद को मुंबई पुलिस अधिकारी बताने वाला व्यक्ति था, जिसने सुकुमार डे को बताया कि उनके नाम पर लिया गया सिम कार्ड आतंकवादी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़ी गतिविधियों, मनी लॉन्ड्रिंग और अश्लील फिल्मों के निर्माण में उपयोग हो रहा है।

साइबर ठगों ने धमकी देते हुए व्हाट्सएप पर फर्जी सुप्रीम कोर्ट लेटरहेड, फर्जी बैंक स्टेटमेंट भेजे, जिसमें दिखाया गया कि सुकुमार के नाम पर एक बैंक खाते में 20 करोड़ रुपये जमा हैं। उनसे पूछा गया कि यह पैसा कहां से आया। जवाब न मिलने पर उन्हें धमकाया गया कि अगर उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उन्हें जेल भेज दिया जाएगा और उनकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी।
डरे हुए सुकुमार डे ने अपराधियों की बात मान ली और उनके निर्देशों पर अपने बैंक खातों से करोड़ों रुपये आरबीआई के नाम पर दिए गए एक खाते में ट्रांसफर कर दिए। अपराधियों ने उन्हें फर्जी आरबीआई नियम पुस्तिका भी भेजी और कहा कि जांच के बाद सारे पैसे लौटा दिए जाएंगे। इसी भ्रम में सुकुमार डे ने अपने गहने तक गिरवी रख दिए और और पैसे भेजे।
अपराधियों ने हर दो घंटे में लोकेशन भेजने और व्हाट्सएप वीडियो कॉल के ज़रिए निगरानी रखने का दबाव बनाया, जिससे सुकुमार खुद को मानसिक रूप से ‘डिजिटल हिरासत’ में मानने लगे।
जब अपराधियों ने अतिरिक्त 40 लाख रुपये की मांग करते हुए आरबीआई के पूर्व गवर्नर सी. रंगराजन के नाम से हस्ताक्षरित फर्जी आदेश भेजा, तब जाकर सुकुमार को शक हुआ और उन्हें एहसास हुआ कि वे ठगी के शिकार हो चुके हैं।
11 जून को उन्होंने आसनसोल कोर्ट चौराहा स्थित साइबर थाना पहुंचकर मामला दर्ज कराया। उसी समय भी ठगों का कॉल उनके मोबाइल पर आया, जिससे पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए।

आसनसोल साइबर क्राइम थाने ने कांड संख्या 48/25 दर्ज कर भारतीय दंड संहिता की धारा 316(2), 318(4), 319(2), 336(3), 338, 340(2)/61(2) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। साथ ही, राज्य साइबर क्राइम विभाग को इसकी सूचना भेज दी गई है।
यह मामला न सिर्फ साइबर सुरक्षा की चिंताओं को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आज भी जागरूक और पढ़े-लिखे लोग भी साइबर अपराधियों के चंगुल में फंस सकते हैं, अगर समय पर सतर्कता न बरती जाए। पुलिस अब मामले की तह तक पहुंचने के लिए जांच में जुटी है।














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