
आसनसोल : कुलटी थाना अंतर्गत नियामतपुर पुलिस फाड़ी क्षेत्र में रविवार को साइबर ठगी की बड़ी साजिश का खुलासा हुआ। नियामतपुर बाजार स्थित एक एटीएम से अवैध रूप से रुपये निकालने के प्रयास में दो युवक पहुंचे, जिनमें से एक को पुलिस ने मौके पर धर दबोचा, जबकि दूसरा युवक पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान सागर रुई दास, निवासी मोचीपाड़ा, नियामतपुर के रूप में हुई है, जबकि फरार युवक का नाम अजित सिंह, निवासी सोदपुर बताया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों युवक एक संगठित साइबर ठगी गिरोह से जुड़े हैं, जिन्होंने एक पीड़ित से धोखे से पैसा ऐंठा और उसे एक बैंक खाते में ट्रांसफर करवाया। बाद में उस खाते से एटीएम के माध्यम से नकदी निकालने के लिए वे नियामतपुर पहुंचे।

हालांकि, उन्हें इस बात की भनक नहीं थी कि जिस खाते में उन्होंने पैसे ट्रांसफर कराए थे, वह साइबर सेल की निगरानी में था। पुलिस पहले से ही उस खाते पर नजर बनाए हुए थी, साथ ही दोनों युवकों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल नंबर भी सर्विलांस पर थे। जैसे ही दोनों युवकों ने एटीएम में कार्ड डालकर पैसे निकालने की कोशिश की, वैसे ही साइबर पुलिस को अलर्ट मिल गया और नियामतपुर पुलिस तुरंत हरकत में आ गई।
पुलिस के अचानक पहुंचने पर दोनों युवक एटीएम से बाहर निकलकर भागने का प्रयास करने लगे। इसी दौरान सागर को पुलिस ने पकड़ लिया, लेकिन अजित पुलिस को चकमा देकर भाग निकला। पुलिस ने बताया कि सागर से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां मिली हैं, जिनके आधार पर पुलिस ने अजित सहित पूरे गिरोह की तलाश तेज कर दी है।
गिरफ्तार सागर को रविवार को ही आसनसोल अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायालय ने उसे पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस अब सागर से उसके नेटवर्क, अन्य साथी, ठगी के तरीके और तकनीकी सहयोगियों की जानकारी ले रही है।

एक पुलिस अधिकारी ने जानकारी दी कि नियामतपुर क्षेत्र धीरे-धीरे साइबर ठगों की शरणस्थली बनता जा रहा है, जो कभी झारखंड के जामताड़ा में देखा गया था। जामताड़ा, जो एक समय साइबर अपराध का गढ़ माना जाता था, वहां पुलिस की कड़ी कार्रवाई के बाद अब ठगी के मामलों में भारी गिरावट आई है। लेकिन अब वहीं गिरोह बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों, विशेषकर नियामतपुर जैसे इलाकों में अपने पाँव पसार रहे हैं।
नियामतपुर पुलिस लगातार सक्रिय है और इस दिशा में कई अभियान चला रही है, ताकि क्षेत्र को साइबर ठगों के प्रभाव से मुक्त कराया जा सके। इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस और साइबर अपराधियों के बीच चुनौतीपूर्ण दौड़ जारी है, और अब देखना यह है कि कानून का डंडा अपराधियों पर पहले पड़ता है या उनकी चालबाज़ी फिर से पुलिस को मात देती है।














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