
आसनसोल : सोमवार को आसनसोल के पूर्व मेयर और पांडवेश्वर के पूर्व विधायक भाजपा नेता जितेंद्र तिवारी एक बार फिर अपने तेज-तर्रार बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने सीधे तृणमूल कांग्रेस के जिला अध्यक्ष नरेन चक्रवर्ती पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया पर तीखी टिप्पणी की है। इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है।
इंस्टॉलमेंट पर खरीदी गाड़ी बनी राजनीतिक निशाना
जितेंद्र तिवारी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करते हुए लिखा,
“भाजपा के जिला अध्यक्ष ने इंस्टॉलमेंट पर एक गाड़ी क्या खरीद ली, नरेन चक्रवर्ती को बहुत पेट में दर्द हो रहा है, लेकिन अपने घनिष्ठ पांडवेश्वर के पंचायत प्रधान के आलीशान मकान पर वे एक शब्द नहीं बोलते।”
इस पोस्ट में तिवारी ने तृणमूल कांग्रेस के दोहरे मापदंडों को उजागर करने की कोशिश की है। उन्होंने इशारों-इशारों में तृणमूल नेताओं पर अपने लोगों के भ्रष्टाचार पर मौन रहने और विपक्ष की छोटी-छोटी बातों पर निशाना साधने का आरोप लगाया है।

सोशल मीडिया पर बयान वायरल, दोनों पक्षों में हलचल
तिवारी की यह पोस्ट देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। भाजपा समर्थकों ने इसे ‘सच का आईना’ बताते हुए जमकर साझा किया, वहीं तृणमूल समर्थकों के बीच बेचैनी का माहौल देखा गया। पोस्ट पर सैकड़ों टिप्पणियां और प्रतिक्रियाएं सामने आईं, जिसमें लोगों ने पंचायत प्रतिनिधियों की संपत्ति और तृणमूल की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए।
तृणमूल की चुप्पी – रणनीति या दबाव?
तिवारी के इस बयान के बाद अब तक नरेन चक्रवर्ती या तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तिवारी ने यह बयान एक सोची-समझी रणनीति के तहत दिया है, जिससे तृणमूल को पंचायत स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर घेरा जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, राजनीतिक लाभ उठाने की मंशा से विपक्ष ऐसी टिप्पणियों का सहारा लेता है। तृणमूल कांग्रेस के लिए यह बयान असहजता का कारण बन सकता है, खासकर तब जब पंचायत चुनावों में पार्टी को कई जगहों पर साफ-सुथरी छवि पेश करने की चुनौती झेलनी पड़ रही है।

भाजपा का प्रहार, तृणमूल की रणनीति
भाजपा नेताओं का मानना है कि तृणमूल कांग्रेस के कई नेता अपनी संपत्ति और खर्चों के स्रोत स्पष्ट नहीं करते, जबकि भाजपा नेताओं की हर छोटी गतिविधि को राजनीतिक मुद्दा बनाया जाता है। तिवारी का बयान इसी राजनीतिक असंतुलन की ओर संकेत करता है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि तृणमूल कांग्रेस इस चुनौती का सामना चुप रहकर करती है या प्रतिवाद में उतरती है। फिलहाल आसनसोल की राजनीति में यह मुद्दा नई बहस और तनाव का केंद्र बन गया है।














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