
आसनसोल : विश्व शिशु श्रम विरोधी दिवस के अवसर पर रविवार को आसनसोल में एक सार्थक और जागरूकता से परिपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मेज़बानी शिशु कल्याण विभाग ने की, जिसमें राज्य के श्रम एवं कानून मंत्री मलय घटक, पश्चिम बर्दवान के जिलाधिकारी एस. पोन्ना बलम, आसनसोल नगर निगम के डिप्टी मेयर अभिजीत घटक सहित कई प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था— शिशु श्रम के खिलाफ जन-जागरूकता फैलाना और समाज को यह संदेश देना कि हर बच्चा शिक्षा का अधिकारी है, न कि श्रम का।
मंच से वक्ताओं ने बाल अधिकारों की सुरक्षा, शिक्षा की अनिवार्यता और सामाजिक उत्तरदायित्व पर बल देते हुए शिशु श्रम उन्मूलन की आवश्यकता को रेखांकित किया।
मंत्री मलय घटक ने अपने संबोधन में कहा, “बचपन कलम और किताब से सजे, न कि फावड़ा और बोझ उठाकर। राज्य सरकार ‘स्कूल चलो अभियान’, ‘कन्याश्री’, ‘किशोरी शक्ति योजना’ जैसी योजनाओं के माध्यम से हर बच्चे को शिक्षा के अधिकार से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।”

उन्होंने यह भी कहा कि समाज के सहयोग के बिना शिशु श्रम को समाप्त करना संभव नहीं। पश्चिम बर्दवान के डीएम एस. पोन्ना बलम ने दो टूक कहा, “शिशु श्रम के खिलाफ लड़ाई केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि यह हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है।”
उन्होंने घोषणा की कि जिला प्रशासन जल्द ही एक विशेष निगरानी अभियान चलाएगा, जिसके तहत शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बाल श्रमिकों की पहचान कर पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी। कार्यक्रम में लिए गए प्रमुख संकल्प: किसी भी प्रकार के शिशु श्रम को सख्ती से रोका जाएगा। सभी बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास होगा।

बाल श्रमिकों की पहचान कर उन्हें विद्यालय भेजा जाएगा। समाज के हर वर्ग को इस अभियान में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाएगा। कार्यक्रम में स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने नारे, पोस्टर और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किए। अंत में यह घोषणा की गई कि ‘नो चाइल्ड लेबर’ अभियान को अब ब्लॉक स्तर तक ले जाकर शिशु श्रम को जड़ से समाप्त करने का प्रयास होगा। सभी उपस्थितजनों ने इस संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया कि “हर बच्चा पढ़ेगा, तभी देश आगे बढ़ेगा।”














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