
आसनसोल : पश्चिम बंगाल दिवस पर विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी द्वारा आयोजित “महा मिछिल” और गिरजा मोड़ पर जनसभा के कुछ ही दिनों बाद तृणमूल कांग्रेस ने उसी स्थान से जवाबी शक्ति प्रदर्शन कर अपनी राजनीतिक ताकत का परिचय दिया। रविवार को तृणमूल कार्यकर्ताओं और नेताओं ने आश्रम मोड़ से गिरजा मोड़ तक एक विशाल रैली निकाली, जिसमें अनुमानतः 10,000 से अधिक कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए।

यह शक्ति प्रदर्शन केवल जनसंपर्क का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी था—कि तृणमूल कांग्रेस अभी भी पश्चिम बर्धमान में संगठित, मजबूत और पूरी तरह चुनावी मोड में है। रैली के दौरान महिला मोर्चा, युवा मोर्चा और ट्रेड यूनियन के कार्यकर्ता ढोल-नगाड़ों, बैनरों और नारों के साथ उत्साहपूर्वक शामिल हुए, जिससे माहौल पूरी तरह जोशपूर्ण और एकजुटता भरा दिखा।

तृणमूल के वरिष्ठ नेताओं ने मंच से कहा, “हम एक थे, एक हैं और एक रहेंगे। तृणमूल कांग्रेस में कोई गुटबाजी नहीं है। ममता बनर्जी के नेतृत्व में हम सभी एकजुट होकर बंगाल के विकास के लिए कार्यरत हैं।” उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “बीजेपी सिर्फ जुमलेबाजी करती है, जबकि तृणमूल जनता के बीच काम कर रही है।” एक प्रमुख नेता ने तीखे लहजे में कहा, “आसनसोल बीजेपी का गढ़ नहीं है, यह ममता दीदी का गढ़ है। शुभेंदु अधिकारी को यह समझना चाहिए कि मंच से भाषण देने से नहीं, जमीन पर काम करने से जनता का विश्वास मिलता है।

रैली की प्रमुख विशेषताएं थीं कि आश्रम मोड़ से गिरजा मोड़ तक का मार्च,सैकड़ों महिला कार्यकर्ताओं की भागीदारी, नारों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और जनसमूह के साथ सांस्कृतिक एकजुटता,युवाओं का उत्साह और स्थानीय नेताओं की सक्रिय भागीदारी रही। इस शक्ति प्रदर्शन के माध्यम से तृणमूल ने यह संदेश दिया ।

पार्टी न सिर्फ विपक्ष का डटकर सामना करेगी, बल्कि आगामी चुनावों में भी पूरी रणनीतिक ताकत और जनसमर्थन के साथ मैदान में उतरेगी। ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता और नेता पूरी तरह संगठित और सक्रिय नजर आ रहे हैं। जनता के बीच यह रैली पार्टी की पकड़ और लोकप्रियता को मजबूत करने का प्रयास भी थी।














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