
आसनसोल : पश्चिम बंगाल सरकार की “दुआरे जगन्नाथ” योजना के अंतर्गत जगन्नाथ देव के दीघा मंदिर से महाप्रसाद वितरण को लेकर राजनीतिक हलकों में घमासान छिड़ गया है। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने इस योजना को राज्य के करदाताओं के पैसों की बर्बादी करार देते हुए तीखी आलोचना की है। भाजपा के राज्य सदस्य कृष्णेन्दु मुखर्जी ने रविवार को प्रेस को संबोधित करते हुए योजना के क्रियान्वयन को लेकर कई सवाल उठाए।
मुखर्जी का कहना है कि सरकार धार्मिक भावनाओं के नाम पर राज्य के बजट का अनुचित उपयोग कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 42 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि इस महाप्रसाद वितरण योजना पर खर्च की जा रही है, जबकि राज्य की शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसी प्राथमिक आवश्यकताओं को अब भी पर्याप्त संसाधन नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, “क्या जनता के टैक्स का पैसा धार्मिक प्रसाद पर खर्च होना चाहिए? क्या यह राज्य की प्राथमिकता होनी चाहिए?”

उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि जिलाधिकारी जैसे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को प्रसाद वितरण जैसे कार्यों में लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी में लगा रहना चाहिए, न कि धार्मिक आयोजनों के आयोजन में। मुखर्जी ने तंज कसते हुए कहा कि प्रशासनिक अमले को “इवेंट मैनेजमेंट कंपनी” के रूप में बदलने की कोशिश हो रही है।
हालांकि राज्य सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है। भाजपा इस योजना को “सेवा” के बजाय “तुष्टिकरण” की राजनीति के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में विभिन्न जिलों में इस विषय को लेकर अभियान चलाया जाएगा। वहीं, जनता के बीच भी इस योजना को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। एक ओर कुछ लोग इसे श्रद्धा और सेवा से जोड़कर देख रहे हैं, तो दूसरी ओर टैक्स के खर्च पर सवाल उठा रहे हैं।
जाहिर है कि “दुआरे जगन्नाथ” योजना आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति में बहस और टकराव का बड़ा विषय बन सकती है।














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