
आसनसोल : देश की औद्योगिक प्रतिष्ठा का प्रतीक चित्तरंजन रेल इंजन कारखाना (सीएलडब्ल्यू) ने एक बार फिर अपनी उत्कृष्टता का परचम लहराया है। महज 75 कार्य दिवसों में 200 विद्युत रेल इंजनों का निर्माण कर इस प्रतिष्ठान ने न केवल इतिहास रचा है, बल्कि उत्पादन क्षमता के नए मानदंड भी स्थापित किए हैं।
चित्तरंजन रेल इंजन कारखाने के 70 वर्षों से अधिक के गौरवशाली इतिहास में इतनी तीव्र गति से इतनी बड़ी संख्या में इंजन निर्माण का यह पहला अवसर है। इस अद्वितीय उपलब्धि में दानकुनी स्थित सहायक इकाई का भी उल्लेखनीय योगदान रहा है, जिसने अकेले 48 इंजन बनाकर अपने स्थापना काल का सर्वाधिक तिमाही उत्पादन दर्ज किया है।

28 जून को 200वां इंजन हुआ रवाना
कारखाने के जनसंपर्क विभाग की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, 28 जून 2025 को 200वें इंजन ने आधिकारिक रूप से सीएलडब्लू परिसर से अपनी यात्रा प्रारंभ की। यह इंजन भारतीय रेल के लिए एक और प्रगति की रेखा खींचता है।
उत्पादन लक्ष्य की ओर बढ़ता आत्मविश्वास
गौरतलब है कि चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए चित्तरंजन रेल इंजन कारखाने का वार्षिक उत्पादन लक्ष्य 777 इंजनों का निर्धारित किया गया है। पिछले वर्ष इसी संख्या तक पहुँचने के लिए कारखाने को 102 कार्य दिवस लगे थे, जबकि इस वर्ष मात्र 75 दिनों में 200 इंजन बनाकर सीएलडब्लू ने 27 दिन पहले यह उपलब्धि हासिल कर ली है। यह न केवल श्रमिकों की मेहनत का परिणाम है, बल्कि प्रबंधन की दूरदर्शिता और तकनीकी दक्षता का भी परिचायक है।

महाप्रबंधक विजय कुमार ने दी टीम को बधाई
इस सफलता पर सीएलडब्लू के महाप्रबंधक विजय कुमार ने “टीम सीएलडब्लू” को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि टीम भावना, अनुशासित कार्य संस्कृति और नवाचार आधारित उत्पादन प्रणाली का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि यह कारखाना भारतीय रेल की रीढ़ है, और इसकी प्रगति राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
औद्योगिक विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम
इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने न केवल चित्तरंजन शहर को गौरवान्वित किया है, बल्कि देश भर में ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की आत्मा को भी सशक्त किया है। रेलवे इंजन निर्माण की दिशा में सीएलडब्लू की यह गति भारतीय रेलवे को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हो रही है।
चित्तरंजन रेल इंजन कारखाना लगातार अपने प्रयासों से भारतीय रेलवे की प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयाँ दे रहा है। उत्पादन के इस नए कीर्तिमान ने एक बार फिर सिद्ध किया है कि समर्पण, कौशल और प्रबंधन के संतुलित समागम से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।














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