

रानीगंज : आदिवासी वीर स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर खनन नगरी रानीगंज के निकटवर्ती बांसरा गाँव में तीन दिवसीय उत्सव का आयोजन हो रहा है। इसी के तहत आदिवासी महिलाओं ने गाँव की लगभग दो किलोमीटर लंबी सड़क पर अल्पनाओं का भव्य श्रृंगार किया है। 15 नवंबर को होने वाले इस खास आयोजन के लिए गाँव की महिलाएँ दिन-रात मेहनत कर आदिवासी संस्कृति को सजीव करते हुए सड़क पर रंग-बिरंगे चित्र बना रही हैं, जिसमें आदिवासी समुदाय की पारंपरिक धरोहर, प्रतीक और नृत्य भंगिमाओं को दर्शाया गया है।

रंगीन अल्पनाओं से सजाए इस रास्ते का उद्देश्य आदिवासी तीरंदाजी प्रतियोगिता में शामिल होने आ रहे विभिन्न जिलों और अन्य राज्यों से आने वाले प्रतिभागियों का स्वागत करना है। इस महोत्सव में आदिवासी कला और संस्कृति को उभारने का विशेष प्रयास किया गया है। आदिवासी युवतियों से लेकर वृद्ध महिलाएँ और गृहणियाँ भी उत्साहपूर्वक अल्पना बनाने में लगी हुई हैं। उनके चित्रों में पारंपरिक धामसा, मादल, तीर-धनुष, फूलों की विविध आकृतियाँ और नृत्य मुद्राएँ झलक रही हैं, जो गाँव की सादगी में रंगों की उमंग और संस्कृति का सजीव चित्रण प्रस्तुत कर रही हैं।

महिलाओं की यह मेहनत केवल साज-सज्जा का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह गाँव की आंतरिक खुशी और गर्व का भी प्रतीक है। उनकी अभिलाषा है कि दूर-दूर से आने वाले आगंतुक इस अद्भुत अल्पना-शोभित गाँव की ओर आकर्षित हों। उन्होंने इस कार्य के लिए दिन-रात एक कर गाँव की सड़कों को संजीवनी रूप दिया है।
बताया जा रहा है कि इस खास मौके पर होने वाली तीरंदाजी प्रतियोगिता में विभिन्न जिलों से ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों से भी तीरंदाज हिस्सा लेंगे, जिनमें कई महिला प्रतिभागी भी शामिल होंगी। उनके स्वागत और सम्मान में यह अल्पना महोत्सव एक प्रतीकात्मक सौंदर्य का रूप ले रहा है।
इस महोत्सव में तीरंदाजी प्रतियोगिता के साथ-साथ आदिवासी नृत्य ‘लागड़े’ और ‘राम मंडी’ और ‘जया हसदा’ द्वारा पारंपरिक संगीत प्रस्तुतियाँ भी होंगी, जिससे दर्शकों को आदिवासी संस्कृति की झलक मिलेगी। यह समस्त आयोजन बांसरा के फुटबॉल मैदान पर संपन्न होगा, जिसमें आदिवासी समाज के संगीत और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी प्रदर्शन किया जाएगा।















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