आसनसोल में जलाशय भूमि भराई को लेकर विवाद, प्रशासन ने रोक लगाई

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आसनसोल :  पश्चिम बर्दवान जिले के वार्ड संख्या 28 में स्थित मुचीपारा शिबपुर मोड़ के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 19 पर स्थित 10 बीघे की जमीन का अधिकांश हिस्सा जलाशय के रूप में था। इस जलाशय के अवैध भराई को लेकर एक बड़ा विवाद उठ खड़ा हुआ है, जहां एक प्रभावशाली स्थानीय व्यवसायी हिरण्मय दास द्वारा सैकड़ों मजदूरों की मदद से जेसीपी मशीनों से इस जलाशय की भूमि भरने का काम किया जा रहा था। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जलाशय के भरने से उनके जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जलाशय के बंद होने के कारण इलाके में व्यापारिक गतिविधियों को भी नुकसान हुआ है। व्यापारियों की दुकानों में पानी घुस जाने से उनके व्यवसाय पर प्रतिकूल असर पड़ा है। एक स्थानीय व्यक्ति, सैवोन रुइदास ने इस भूमि का बरगादार होने का दावा करते हुए कहा कि इस जलाशय का पानी इस जमीन में ही जमा होता था और अब इसे भरने के बाद इसे पुनः खेती के लायक बनाया जाएगा।

हालाँकि, भूमि एवं भू-राजस्व विभाग के अधिकारी इस मुद्दे पर कुछ और ही बयान देते हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह भूमि सरकारी जलाशय के रूप में पहचानी गई है, और बिना सरकारी अनुमति के इसे भरना कानूनन अवैध है। सूचना मिलते ही भू-राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे थे, और उन्होंने यह पूछने की कोशिश की कि इस भूमि को भरने के लिए अनुमति किसने दी थी, लेकिन किसी ने भी इस सवाल का जवाब नहीं दिया। इसके बाद अधिकारियों ने भूमि भराई के काम पर फिलहाल रोक लगा दी है।

इस मुद्दे में एक नया मोड़ तब आया जब करंगपारा गांव के निवासी सुब्रत दत्ता ने आरोप लगाया कि जिस भूमि को भर दिया गया है, उसमें से तीन बीघे भूमि उनकी मां दुर्गा देवता की थी। उन्होंने बताया कि इस भूमि की रजिस्ट्री बिना उनकी अनुमति के कर दी गई थी और अब यह मामला दुर्गापुर सब डिवीजनल कोर्ट में जा पहुंचा है।

वहीं, भू-राजस्व विभाग के अधिकारी उत्पल कुमार साहा ने बताया कि यह भूमि जलाशय के रूप में चिन्हित की गई थी। उन्होंने कहा कि वेटलैंड्स को बिना सरकारी अनुमति के नहीं भरा जा सकता और इस मामले में जांच जारी है।

भूमि भराई के आरोपी व्यवसायी हिरण्मय दास ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस भूमि भराई के काम के बारे में कोई जानकारी नहीं है और यह केवल बरगादारी के कार्य में लगे किसानों की जानकारी है।

यह मामला अब प्रशासन के लिए चुनौती बन चुका है और इसकी पूरी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी और जलाशय की अवैध भराई की पूरी जांच की जाएगी।

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