
बाराबनी : वीर बिरसा मुंडा की 149वीं जयंती के अवसर पर रूपनारायणपुर स्थित श्रमिक मंच पर पश्चिम बंगाल आदिवासी समाज सेवा समिति की पश्चिम बर्दवान जिला इकाई के तत्वावधान में भव्य ‘वीर बिरसा मुंडा सम्मान समारोह 2024’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्थानीय आदिवासी समुदाय के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेकर समारोह को यादगार बनाया।
वीर बिरसा मुंडा, जो झारखंड के रांची क्षेत्र के मुंडा आदिवासी समुदाय के समाज सुधारक थे, ने ब्रिटिश शासकों के अत्याचारों के विरुद्ध ‘मुंडा विद्रोह’ का नेतृत्व किया था। उन्हें उनके अनुयायियों द्वारा ‘बिरसा भगवान’ के रूप में पूजा जाता है। इस ऐतिहासिक दिवस को स्थानीय आदिवासी समुदाय ने धूमधाम से मनाया। समारोह में आदिवासी परंपरागत वाद्य यंत्रों ‘धामसा-मादल’ की धुन पर नृत्य और गीतों का आयोजन हुआ।

समारोह का उद्घाटन आसनसोल नगर निगम के मेयर और बाराबनी विधायक विधान उपाध्याय ने किया। उन्होंने बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार अतिथियों का स्वागत किया गया। विधान उपाध्याय ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में आदिवासी समुदाय के साथ झूमुर नृत्य में सहभागिता कर सभी का मन मोह लिया।
इस अवसर पर पश्चिम बंगाल कोल आदिवासी सेवा संघ के जिला अध्यक्ष राजेश कोल ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड, बिहार और ओडिशा में कोल समाज को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा प्राप्त है, लेकिन पश्चिम बंगाल में आज भी यह समाज इस अधिकार से वंचित है। उन्होंने इस समुदाय की स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका पर प्रकाश डाला और अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।

समारोह में विधान उपाध्याय ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार आदिवासियों के उत्थान के लिए निरंतर कार्यरत है। कोल समाज की इस महत्वपूर्ण मांग को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तक पहुँचाने और उचित मंच पर उठाने का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के अलावा जिला परिषद कर्माध्यक्ष मोहम्मद अरमान, पंचायत समिति अध्यक्ष कैलाशपति मंडल, उपाध्यक्ष विद्युत मिश्रा, अचरा पंचायत उपप्रधान जयदेव महतो, जितपुर पंचायत प्रधान सुजीत मोदक तथा कोल संघ के सचिव सनातन कोल और कोषाध्यक्ष विस्पत कोल सहित कई विशिष्ट व्यक्ति उपस्थित थे।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में आदिवासी समुदाय के पारंपरिक नृत्य और गीतों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर ‘बिरसा मुंडा कोल रत्न पुरस्कार’ प्रदान कर समाज के विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम ने न केवल वीर बिरसा मुंडा के योगदान को सम्मानित किया, बल्कि आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को भी सजीव कर दिया।















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