
जामुड़िया : दामोदर और अजय नदियों में अवैध बालू खनन अब एक सामान्य बात बन चुकी है, जो हर दिन हजारों टन बालू की चोरी के रूप में जारी है। इसके बावजूद प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर मौन है, जिससे बालू माफियाओं को अपना अवैध कारोबार फैलाने का एक सुनहरा अवसर मिल रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस धंधे में कुछ प्रभावशाली नेताओं, राजनीतिक व्यक्तियों और प्रशासनिक अधिकारियों का कथित रूप से हाथ है, जो इन गतिविधियों को संरक्षण दे रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रहे इस अवैध खनन से पर्यावरण का संतुलन पूरी तरह से बिगड़ रहा है। नदी के तट पर हो रहे कटाव के कारण आस-पास के गांवों में बाढ़ और भूमि कटाव का खतरा बढ़ गया है। इससे ना केवल उनकी कृषि योग्य भूमि खतरे में है, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हो रही है। पहले जो नदी जीवनदायिनी थी और कृषि के लिए सहायक थी, अब माफियाओं के अवैध लाभ का केंद्र बन गई है।

अवैध खनन के कारण नदी की जलधारा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, जिससे पानी की गुणवत्ता और स्तर में गिरावट आई है। इस मामले में प्रशासन का लापरवाह रवैया और स्थानीय अधिकारियों की अनदेखी गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि अगर यह स्थिति यूं ही जारी रही, तो आने वाले दिनों में नदियों के साथ-साथ पूरे क्षेत्र का पर्यावरण और जीवनदायिनी जलस्रोत संकट में पड़ जाएगा।
अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन इस मुद्दे पर सख्त कदम उठाएगा या माफिया तंत्र के दबाव में यह अवैध खनन और अधिक बढ़ेगा?















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