
आसनसोल : बर्नपुर के धर्मपुर स्थित फ्री प्राइमरी स्कूल में बुधवार को बड़ा हंगामा हुआ, जब छात्रों के अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल की प्रिंसिपल बच्चों से श्रम करवाती हैं। आरोप है कि स्कूल में पढ़ाई करने वाले बच्चों से न केवल झाड़ू लगवाया जाता है, बल्कि शौचालय भी साफ करवाए जाते हैं। इस मामले की जानकारी मिलने पर 98 नंबर वार्ड की पार्षद, कहकशां रियाज, स्कूल पहुंची, जहां उनकी भी प्रिंसिपल के साथ कहासुनी हो गई।
पार्षद कहकशां रियाज ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके वार्ड में कुल पांच फ्री प्राइमरी स्कूल हैं, जिनमें से कोई भी स्कूल इस प्रकार की समस्याओं से ग्रस्त नहीं है। उन्होंने बताया कि धर्मपुर फ्री प्राइमरी स्कूल में हमेशा से ही समस्याएं सामने आ रही हैं, जिनमें मिड डे मील वितरण में भी उलझनें उत्पन्न हो चुकी थीं। अब बच्चों से श्रम करवाने के मामले ने हालात को और खराब कर दिया है।

पार्षद ने यह भी बताया कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रिंसिपल केवल उन्हीं बच्चों से झाड़ू लगवाती हैं या शौचालय साफ करवाती हैं, जिनके अभिभावक स्कूल में फीस या अन्य किसी प्रकार का भुगतान नहीं कर पाते। इस पर पार्षद ने कहा कि यह फ्री प्राइमरी स्कूल है, जहां किसी भी बच्चे से पैसे लेने का कोई प्रावधान नहीं है। फिर भी प्रिंसिपल ने अपनी मनमर्जी से यह कार्य शुरू कर दिया है।
पार्षद के साथ की गई बातचीत में उन्होंने बताया कि जब उन्होंने इस मामले पर स्कूल की प्रिंसिपल से बात करने की कोशिश की, तो प्रिंसिपल ने उनसे भी बदतमीजी की। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से अनुरोध किया कि वे इस मामले का तुरंत संज्ञान लें और प्रिंसिपल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।

इस संदर्भ में अभिभावक सुमन कुमारी ने भी अपनी आपबीती साझा की। उन्होंने कहा कि उनके दो बच्चे इस स्कूल में पढ़ते हैं और उन्हें भी प्रिंसिपल द्वारा झाड़ू लगाने के लिए कहा गया। जब उन्होंने बच्चों से यह बात सुनी, तो वे स्कूल गईं और प्रिंसिपल से बातचीत करने की कोशिश की। इस दौरान प्रिंसिपल ने उन्हें धक्का दिया और धमकी दी कि यदि वे इस तरह की बात करेंगी तो न केवल उनका शोषण होगा, बल्कि उनके बच्चों को ट्रांसफर सर्टिफिकेट देकर कहीं और नहीं दाखिला लेने दिया जाएगा।
इस घटनाक्रम को लेकर जब मीडिया कर्मियों ने स्कूल की प्रिंसिपल से बात करने की कोशिश की, तो उन्होंने बेहद बेरुखी से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनके पास बच्चों के अभिभावकों से पैसे लेने के लिए सर्कुलर मौजूद है, लेकिन जब मीडिया कर्मियों ने उस सर्कुलर को देखने की मांग की, तो उन्होंने स्कूल से बाहर जाने के लिए कह दिया।
अब यह मामला शिक्षा विभाग के अधिकारियों के संज्ञान में है और इस पर त्वरित कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।















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