
दुर्गापुर : स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के दुर्गापुर स्टील प्लांट (DSP) में पेंशन निधि में हुए लगभग 3 करोड़ 33 लाख रुपये की वित्तीय हेराफेरी के मामले में पुलिस ने निलंबित वित्त विभाग के डिप्टी जनरल मैनेजर (डीजीएम) पिनाकी रंजन मुखर्जी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को गिरफ्तार कर पुलिस ने दुर्गापुर कोर्ट में पेश किया, जहां से उनकी जमानत याचिका अस्वीकार कर 29 अक्टूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।पुलिस के अनुसार, वित्तीय विभाग के निलंबित डीजीएम पिनाकी रंजन मुखर्जी और डिप्टी मैनेजर ध्रुव ज्योति मुखर्जी पर आरोप है कि उन्होंने मिलकर पेंशन फंड में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं को अंजाम दिया। ध्रुव ज्योति मुखर्जी इस समय फरार हैं, और पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।इस वित्तीय अनियमितता का मामला उजागर होने पर विभिन्न श्रमिक संगठनों ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कठोर कार्रवाई की मांग की। सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में पाया गया कि पेंशन निधि में धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के निर्माण, और आपराधिक साजिश के माध्यम से यह गबन किया गया। बताया गया है कि सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए 2020-21 से लेकर वर्तमान तक 3 करोड़ 33 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान दर्शाया गया है।


इसके साथ ही आवश्यकता से अधिक खर्च दिखाकर राशि का दुरुपयोग किया गया।सेल की अकाउंटिंग फर्म द्वारा इस वित्तीय अनियमितता का पता चलते ही तत्काल जांच प्रारंभ हुई, जिसके बाद डीएसपी के वित्त विभाग के इन दोनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि गबन की गई राशि विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित की गई, जिसमें डीएसपी के सेवानिवृत्त और वर्तमान कर्मचारी दोनों शामिल हैं। कुल मिलाकर 15 बैंक खातों में यह राशि भेजी गई, जिससे वित्तीय घोटाले का स्वरूप और गंभीर हो गया। दुर्गापुर थाने में दर्ज की गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने अपनी जांच में आरोपियों पर सरकारी नियमों का आपराधिक उल्लंघन, धोखाधड़ी और जालसाजी के कई गंभीर आरोप लगाए हैं। स्थानीय श्रमिक संगठनों ने इस घोटाले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इस प्रकरण में दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई की मांग की है। इस गंभीर वित्तीय अनियमितता का खुलासा होने से DSP के वित्त विभाग में अनुशासनहीनता और कर्तव्यविहीनता का मुद्दा भी गहराया है। श्रमिक संगठनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने न्यायिक जांच की मांग करते हुए यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि दोषियों को सख्त सजा मिले और इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगे।
















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