दुर्गापुर के प्रसेनजीत स्वर्णकार अपनी बहन के हत्यारे को सजा दिलाने के लिए दुर्गापुर से साइकिल चलाकर कोलकाता राज्यभवन के लीये निकल पड़े ।

Facebook
Twitter
WhatsApp

IMG 20240713 234417 1

दुर्गापुर: दो साल पहले बहन की हुई थी हत्या, दो भतीजे-भतीजी का नहीं मिला पता परिवार ने न्याय के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से लेकर प्रशासन के सभी स्तरों पर गुहार लगाई। बहन का पति अभी भी लापता है, भतीजा, भतीजी का पता नहीं चल पाया है l न्याय की आस में प्रसेनजीत स्वर्णकार आज साइकिल चलाकर दुर्गापुर से राज्यपाल तक पहुंचे l
करीब दो साल पहले दुर्गापुर के कोक वेवन थाना अंतर्गत अंगदपुर स्थित घर से पुलिस ने उमा खातून का सड़ा-गला शव बरामद किया था l घटना के एक दिन पहले से ही उसका पति फरार था l प्यार के चक्कर में उमा ने अपने माता-पिता की मर्जी के खिलाफ दुर्गापुर के रफीक आलम से शादी कर ली, उमा के दो बच्चे हैं, ये दोनों बच्चे अभी भी लापता हैं l परिवार को शक है कि अंगदपुर इलाके में दीदी के घर के पड़ोसी छोटे लाल और उनकी पत्नी को इस बारे में सब पता था, लेकिन पुलिस को सूचना देने के बाद दोनों ने एक बार पुलिस को फोन किया और फिर कोकोवेन थाने की पुलिस ने दोबारा फोन नहीं किया l उन पर दबाव डालने से सारी सच्चाई पता चल सकती थी, यहां तक ​​कि पुलिस भी यह जानने में बहुत झिझक रही थी कि उमा का पति कहां है। उमर के परिवार ने न्याय के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लिखित गुहार लगाई, इसकी सूचना आसनसोल दुर्गापुर पुलिस से लेकर अनुमंडल प्रशासन से लेकर सभी जगहों को दी गयी, लेकिन कुछ नहीं हुआ l लेकिन आज भी उमा का पति रफीक आलम, जो अभी भी लापता है, परिवार के संदेह की सूची में है l आरोप ये है की पैसे देकर छोटेलाल ने इस परिवार को एफआईआर से अपना नाम हटाने का लालच दिया, लेकिन यह असहाय परिवार इस प्रलोभन में नहीं आया पूरा परिवार l

IMG 20240716 153721
अंत में न्याय न मिलने पर दुर्गापुर के कोक ओवेन थाना क्षेत्र के एल. उमा के दादा प्रसेनजीत स्वर्णकार अपनी बहन की हत्या के लिए न्याय मांगने के लिए साइकिल से कलकत्ता के बी टाइप स्थित घर से राजभवन गए थे। अपनी बहन के हत्यारे को सजा दिलाने और दोनों भतीजे-भतीजियों को ढूंढने की गुहार लेकर, प्रसेनजित सभी दस्तावेज लेकर राजभवन के लिए रवाना हो गए।
बेटी के गम में उमा के पिता ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित हैं l उनकी एक आंख की रोशनी भी चली गई है। आज न्याय की आस में माँ के आंसू सूख गए l बेटी चली गई, अब बेटे को कोई रोशनी नहीं मिलेगी? इस डर से पूरे परिवार की रातों की नींद उड़ गई।
एक डर अब भी है, क्या प्रसेनजीत साइकिल से राजभवन पहुंच पाएंगे? पुलिस की नाकामी छुपाने के लिए वो साइकिल बीच सड़क पर तो नहीं रोकी जाएगी? हालाँकि, मन की अदम्य इच्छाशक्ति के बल पर एक भाई अपनी बहन की हत्या के लिए न्याय की उम्मीद में सभी बाधाओं को पार करके राज्यपाल के पास पहुँचना चाहता है।

Leave a Comment

Leave a Comment

What does "money" mean to you?
  • Add your answer

Share Market

Also Read This

Gold & Silver Price

Our Visitor

0 3 3 5 1 6
Users Today : 36
Users Yesterday : 23