आज के आसमान छूते सब्जियों के दर से जनता हल्कान लेकिन कोई नहीं कह रहा “महंगाई डायन खाये जात है”

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आसनसोल : “महंगाई डायन खाये जात है” मशहूर गीत आज मानो विलुप्त हो गई है l एक समय जब आज के सत्ता पक्ष विपक्ष में बैठते थे, तों अक्सर जरुरी सामग्रीयो के दर जंहा बढ़ते थे, टीवी से लेकर सड़को तक ये गाने कई तरह से सुनने मिल जाते थे l आज ज़ब हर एक चीज की कीमत आसमान छू रही है l तब ये “महंगाई डायन खाये जात है” कंही नहीं सुनाई दे रहा है l इसका कारण क्या समझा जाये, की विपक्ष मुद्दों को उठाना नहीं जानती, बस चुनाव के वक़्त अपना ढ़ोल बजती है l सबसे बड़ी बात जनता ने इसबार मतदान में सबको ख़ुश किया मजबूत बिपक्ष दिया किन्तु क्या फायदा l सांसद से सड़को तक महंगाई को लेकर आंदोलन करनेवाला कोई दिखाई नहीं देता l हाँ गाहे बगाहे संसद में एकाक सांसद इसर स्पीच दें जरूर देते है l लेकिन उसका असर धरती पर नहीं दीखता l विपक्ष के पास इतना बढ़ा मुद्दा है फिर विपक्ष सड़को पर क्यों नहीं उतरती? या आजकल आंदोलन भी डिजिटल ही होगा, ट्वीट या पोस्ट कर के ही विपक्ष सत्ता पक्ष को घेरेंगे? बीते 2 दिन आगे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को महंगाई दिखी, उन्होंने इसपर लगाम लगाने के लीये कमर कसा और अपने अधिकारियो को मैदान में कूद जाने का निर्देश दिया l फिर प्रशासन रेस हुई लगातार हर इलाके के सब्जी बाजार में छापे पड़े कइयों को फाइन किया गया, कइयों को सीज l कल आसनसोल के मुख्य बाजार, कोर्ट बाजार, बाबू बाजार में भी छापमारी हुई l नतीजा ये रहा की आज बाजार में सब्जियों की दारों में हल्की कमी देखि गई l लोगों ने थोड़ी राहत की सांस ली l लेकिन प्रशासन को इसी तरह बीच बीच में जांच अभियान चलना चाहिए ताकि काला बाज़ारी ना हो l

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