
पुरुलिया : बिहार के प्रतिष्ठित आभूषण प्रतिष्ठान में हुए 25 करोड़ रुपये के सनसनीखेज डकैती कांड की कड़ियाँ पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिला कारागार से जुड़ी पाई गई हैं। पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ है कि जेल में निरुद्ध विचाराधीन अपराधी चंदन कुमार उर्फ प्रिंस ने आधुनिक संचार उपकरणों की सहायता से अपने गिरोह को इस संगठित अपराध की विस्तृत योजना समझाई। इस खुलासे के पश्चात पुरुलिया जिला पुलिस ने जेल में सघन तलाशी अभियान चलाया, जिसके दौरान एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन और ब्लूटूथ ईयरफोन बरामद किए गए। इस घटनाक्रम ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है कि आखिर एक बंदी के पास संचार उपकरण कैसे पहुँचे।

यह प्रकरण तब प्रकाश में आया जब बिहार पुलिस ने मुठभेड़ के पश्चात दो डकैतों को गिरफ्तार किया और उनसे बरामद मोबाइल फोन के विश्लेषण में एक संदिग्ध नंबर की पहचान की, जिसकी लोकेशन पुरुलिया जिला सुधार गृह में पाई गई। इसके बाद बिहार पुलिस ने पुरुलिया जिला पुलिस को सूचित किया, जिसके आधार पर जेल में छापा मारा गया और संदेहास्पद इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। इस मामले में पुरुलिया सदर थाने में चंदन कुमार उर्फ प्रिंस के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है।

पुरुलिया जिला जेल के अधीक्षक स्वपन कुमार दास ने पुष्टि की कि जिला पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार जेल में व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया, जिसमें एक बैग से मोबाइल और ब्लूटूथ ईयरफोन बरामद किए गए। जब्त उपकरणों को पुलिस के हवाले कर दिया गया है, जो अब यह जांच कर रही है कि ये उपकरण जेल के भीतर कैसे पहुँचे और इस संगठित अपराध में और कौन-कौन संलिप्त था।

उल्लेखनीय है कि 30 अगस्त 2023 को पुरुलिया में सेंको गोल्ड लूटकांड में भी बिहार के अपराधियों की संलिप्तता उजागर हुई थी। इस बार बिहार के आरा जिले में छह सशस्त्र अपराधियों ने एक प्रतिष्ठित आभूषण विक्रेता के प्रतिष्ठान से 25 करोड़ रुपये मूल्य के स्वर्णाभूषण लूट लिए थे। बिहार पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए डकैतों का पीछा किया, जिसके दौरान हुई मुठभेड़ में दो अपराधी घायल हो गए और गिरफ्तार कर लिए गए। गिरफ्तार अपराधियों से हुई पूछताछ और उनके मोबाइल डेटा विश्लेषण से यह सनसनीखेज जानकारी सामने आई कि डकैती की संपूर्ण रूपरेखा पुरुलिया जेल से रची गई थी।
अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क को उजागर करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि जेल के भीतर बंदी के पास मोबाइल जैसे उपकरण कैसे पहुँचे और इस षड्यंत्र में और कौन-कौन सम्मिलित था।















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