
पूर्व बर्दवान : राज्य सरकार की “तरुण स्वप्न योजना” के तहत 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों को टैब खरीदने के लिए दिए गए 10-10 हजार रुपये के घोटाले में चार और लोगों की गिरफ्तारी हुई है। यह गिरफ्तारी मालदा से की गई है और पकड़े गए लोगों में एक कंप्यूटर शिक्षक भी शामिल है। बर्दवान साइबर पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ है कि बांग्ला शिक्षा पोर्टल को हैक कर छात्रों के बैंक खाता नंबरों में बदलाव कर दिया गया था, जिससे सरकार द्वारा दी जाने वाली यह राशि गलत खातों में ट्रांसफर हो गई।
इस धोखाधड़ी का मामला तब सामने आया जब पूर्व बर्दवान के कई स्कूलों, खासकर सीएमएस हाई स्कूल के 28 छात्रों ने यह शिकायत दर्ज कराई कि उनके खातों में सरकार द्वारा भेजी गई राशि नहीं पहुंची। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और जांच शुरू हुई। पुलिस ने पाया कि कई छात्रों की रकम उनके बैंक खाते में न जाकर अन्य राज्यों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई थी।

इस मामले की तह तक जाने के लिए बर्दवान पुलिस ने मालदा जिले में कार्रवाई की और हासेम अली नामक एक युवक को गिरफ्तार किया। हासेम की निशानदेही पर पुलिस ने पिंटू शेख, जमाल शेख, श्रवण सरकार, और रॉकी शेख नामक चार अन्य लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया। खास बात यह है कि रॉकी शेख मालदा के भगवानपुर केबीएस स्कूल में संविदा कंप्यूटर शिक्षक के रूप में कार्यरत था और उस पर कई स्कूल खातों में लॉग-इन क्रेडेंशियल्स उपलब्ध कराने का भी आरोप है। पुलिस के अनुसार, रॉकी ने इस गबन के लिए तकनीकी सहायता प्रदान की और बैंक खातों को हैक करने में सहायक रहा, जिससे राशि दूसरे खातों में स्थानांतरित कर दी गई।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के शिक्षा विभाग ने जांच में सहयोग देना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मामले पर कड़ा संज्ञान लिया है और छात्रों को उनकी राशि जल्द से जल्द भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। शिक्षा विभाग अब छात्रों के खातों में नए सिरे से पैसे भेजने की प्रक्रिया में जुट गया है ताकि जिन छात्रों को इस योजना के तहत राशि मिलनी थी, वे प्रभावित न हों।

इस घोटाले के सामने आने के बाद, यह स्पष्ट हुआ कि साइबर धोखाधड़ी के जरिए न केवल छात्रों को उनके अधिकार से वंचित किया गया बल्कि राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजना को भी अपमानित किया गया। बर्दवान साइबर विंग की टीम अन्य आरोपियों और इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने में जुटी है। यह माना जा रहा है कि इस गिरोह का जाल काफी फैला हुआ है और इसमें कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस ने गिरफ्तार व्यक्तियों से पूछताछ कर अन्य संबंधित व्यक्तियों का पता लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
राज्य में शिक्षा प्रणाली में तकनीकी सुरक्षा उपायों के कमजोर होने के कारण यह धोखाधड़ी संभव हो पाई। शिक्षा विभाग अब इस दिशा में कदम उठाते हुए बांग्ला शिक्षा पोर्टल की सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।















Users Today : 37
Users Yesterday : 23