
दुर्गापुर : पश्चिम बर्दवान जिले के दुर्गापुर स्थित भीरिंगी श्मशान काली मंदिर में शनिवार को 173वां वार्षिक पूजा उत्सव भव्य रूप से आयोजित किया गया। यह मंदिर श्रद्धा और आस्था का केंद्र माना जाता है, जहां दूर-दूर से भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर मां के चरणों में आते हैं।
मंदिर का इतिहास 1852 से जुड़ा है, जब साधक अक्षय कुमार राय ने श्मशान क्षेत्र के एक तालाब किनारे दिव्य स्वप्नादेश पाकर तपस्या आरंभ की। कठिन साधना के उपरांत उन्होंने सिद्धि प्राप्त की और इसी स्थान पर काली मंदिर की स्थापना की। भक्तों का मानना है कि मां काली यहां आने वाले हर श्रद्धालु की मनोकामना पूरी करती हैं।

मंदिर के सेबायत साधन कुमार राय ने बताया कि परंपरा के अनुसार हर वर्ष पुराने विग्रह का पवित्र तालाब में विसर्जन किया जाता है और उसकी जगह नए विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है। इस बार भी शाम के समय पुराने विग्रह का विसर्जन कर नए विग्रह की स्थापना की जाएगी।

मंदिर प्रांगण में दिनभर भक्तिमय आयोजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। श्रद्धालुओं के लिए खिचड़ी प्रसाद और विशेष भोग का वितरण किया गया। हजारों की संख्या में जुटे भक्तों ने उत्सव में शामिल होकर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
भीरिंगी श्मशान काली मंदिर केवल दुर्गापुर ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य में आस्था का एक विशेष केंद्र बना हुआ है। यहां की वार्षिक पूजा सदियों पुरानी परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत प्रमाण है।















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