आसनसोल : अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करने वाले आसनसोल के युवा निशानेबाज अभिनव साव को आखिरकार अपने ही राज्य से वह सम्मान और प्रोत्साहन मिला, जिसकी उन्हें लंबे समय से प्रतीक्षा थी। जर्मनी में विश्व जूनियर निशानेबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाले 18 वर्षीय अभिनव को ‘अटल खेल सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सम्मान के साथ सरकार की ओर से 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई। मंगलवार को मिले इस सम्मान की चर्चा बुधवार को खेल जगत और स्थानीय क्षेत्र में बनी रही।
अभिनव ने कम उम्र में ही निशानेबाजी के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उनकी उपलब्धियों के बावजूद राज्य स्तर पर अपेक्षित सहयोग और पहचान नहीं मिलने से परिवार लंबे समय से निराश था। स्थिति यहां तक पहुंच गई थी कि अभिनव ने भविष्य में बंगाल छोड़कर किसी अन्य राज्य की ओर से प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का मन बना लिया था।
सम्मान के बाद बदला फैसला
राज्य सरकार की ओर से मिले सम्मान और आर्थिक सहायता के बाद अभिनव तथा उनके परिवार की नाराजगी दूर हुई है। अभिनव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अपने घर से मिलने वाली स्वीकृति और सम्मान का अनुभव अलग होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वह बंगाल छोड़ने के बारे में नहीं सोच रहे हैं और आगे राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए ही देश के लिए पदक जीतने की कोशिश करेंगे।
बताया गया कि लगभग एक सप्ताह पहले राज्य के नए खेल मंत्री डॉ. इंद्रनील खां ने अभिनव और उनके पिता रूपेश कुमार साव से बातचीत की थी। इस दौरान सरकार की ओर से खिलाड़ी को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद परिवार ने अपना पूर्व निर्णय बदलने का फैसला किया।
जर्मनी में बनाया विश्व रिकॉर्ड
अभिनव ने जर्मनी में आयोजित विश्व जूनियर निशानेबाजी चैंपियनशिप में 10 मीटर एयर राइफल मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया था। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने विश्व स्तर पर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसके अलावा राष्ट्रीय खेलों में भी वह कांस्य पदक जीत चुके हैं। उनके संग्रह में राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के कई पदक और ट्रॉफियां हैं।
वर्तमान में अभिनव की सबसे बड़ी प्राथमिकता वर्ष 2028 में होने वाले लॉस एंजिल्स ओलंपिक की तैयारी है। जूनियर वर्ग में वह देश में शीर्ष स्थान पर बताए जा रहे हैं, जबकि वरिष्ठ वर्ग में उनकी रैंकिंग छठे स्थान पर है। ऐसे में आगामी वर्षों में उनकी तैयारी और प्रशिक्षण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पिता का सपना बेटे ने किया पूरा
अभिनव के पिता रूपेश कुमार साव ने बताया कि स्वयं निशानेबाज बनने का उनका सपना आर्थिक अभाव के कारण पूरा नहीं हो सका था। इसी कारण बेटे के जन्म के बाद उन्होंने उसे निशानेबाज बनाने का संकल्प लिया। शुरुआती दौर में अनेक कठिनाइयों के बावजूद अभिनव ने लगातार मेहनत की और सफलता हासिल की।
रूपेश साव के अनुसार, सरकार से मिला सम्मान परिवार के लिए संतोष का विषय है। उन्होंने कहा कि आर्थिक सहायता से अभिनव को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण लेने में मदद मिलेगी। उनका प्रयास है कि उसे विदेश में अनुभवी प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण दिलाया जाए, ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में वह और बेहतर प्रदर्शन कर सके।
उन्होंने कहा कि अब सम्मान के साथ अभिनव की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। परिवार का लक्ष्य स्पष्ट है—ओलंपिक की तैयारी पर पूरा ध्यान केंद्रित करते हुए देश और बंगाल के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पदक हासिल करना।

















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