बांकुड़ा : जंगलमहल क्षेत्र से गुरुवार को माओवादी गतिविधियों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई। पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के तीन वरिष्ठ नेताओं ने बुधवार को पुलिस के समक्ष हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया। पुलिस के अनुसार, तीनों करीब दो दशक से संगठन से जुड़े हुए थे और पश्चिम बंगाल के जंगलमहल तथा झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय रहे थे।

आत्मसमर्पण करने वालों की पहचान जाबा महतो उर्फ बुलू, नयनतारा साहू उर्फ मीता और रामप्रसाद मंडी उर्फ सचिन के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक जाबा महतो और नयनतारा साहू संगठन की जोनल कमेटी की सदस्य थीं, जबकि रामप्रसाद मंडी बंगाल-झारखंड-ओडिशा क्षेत्रीय कमेटी से जुड़ा हुआ था।
पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में आत्मसमर्पण
बुधवार को बांकुड़ा पुलिस लाइन स्थित सम्मेलन कक्ष में आयोजित कार्यक्रम के दौरान तीनों ने अपने हथियार पुलिस को सौंपे। इस अवसर पर पश्चिमी क्षेत्र के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आनंद कुमार और बांकुड़ा के पुलिस अधीक्षक पी.वी.जी. सतीश सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद थे।
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण के दौरान तीनों ने एक एके-47, दो इंसास राइफल, 10 मैगजीन और 154 जीवित कारतूस जमा किए। पुलिस ने बताया कि ये हथियार पूर्व में सुरक्षा बलों से छीने गए थे।

कई जिलों में सक्रिय रहा नेटवर्क
पुलिस के अनुसार, तीनों की गतिविधियां पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा, पुरुलिया, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर जिलों तक रही हैं। इसके अलावा झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के कोल्हान क्षेत्र में भी इनके सक्रिय रहने की जानकारी पुलिस ने दी है।
पुलिस अभिलेखों के अनुसार तीनों के खिलाफ सामूहिक रूप से 75 से अधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या सहित गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए), शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक अधिनियम से जुड़े मामले शामिल हैं। कुछ पुलिस सूत्रों ने मामलों की संख्या करीब 80 बताई है।
आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तीनों ने राज्य सरकार की आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास नीति के तहत हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। पश्चिमी क्षेत्र के एडीजी आनंद कुमार ने कहा कि पुनर्वास से संबंधित प्रस्ताव निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुलिस की स्क्रीनिंग समिति के समक्ष भेजा जाएगा।
हालांकि आत्मसमर्पण के बावजूद उनके खिलाफ दर्ज पुराने आपराधिक मामलों की कानूनी प्रक्रिया समाप्त नहीं होगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि संबंधित मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी और जांच के दौरान तीनों से अलग-अलग चरणों में पूछताछ भी की जाएगी।

जंगलमहल में सुरक्षा गतिविधियों के बीच घटनाक्रम
तीनों का आत्मसमर्पण ऐसे समय हुआ है, जब बंगाल-झारखंड सीमा से लगे जंगल क्षेत्रों में माओवादी नेटवर्क के खिलाफ सुरक्षा अभियान जारी हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय से चल रहे अभियान और आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के माध्यम से संगठन से जुड़े लोगों को हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन में लौटने का अवसर दिया जा रहा है।
बुधवार को बांकुड़ा में हुए इस आत्मसमर्पण के बाद अब पुलिस की जांच का अगला चरण तीनों से जुड़े पुराने मामलों और उनके नेटवर्क से संबंधित तथ्यों पर केंद्रित रहेगा। वहीं पुनर्वास के लिए निर्धारित सरकारी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।














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