हत्या के मामले में दो वर्ष बाद फैसला, साक्ष्यों के अभाव में ट्रक चालक समेत दो आरोपी बरी

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आसनसोल :  गुरुवार को आसनसोल न्यायालय में करीब दो वर्ष से अधिक समय से चल रहे हत्या के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला आया। न्यायालय ने पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में दो आरोपियों रविरंजन कुमार और छोटू साव को हत्या के आरोप से बरी कर दिया। दोनों पर वर्ष 2024 में कुल्टी थाना क्षेत्र में ट्रक चालक सुबोध कुमार यादव की मौत के मामले में हत्या का आरोप लगाया गया था।

आसनसोल न्यायालय की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ विशाखा मंडल (दास) की अदालत में मामले की सुनवाई और गवाहों के बयान दर्ज किए गए। सुनवाई पूरी होने के बाद बुधवार को अदालत ने दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए मामले से बरी करने का आदेश दिया।

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दोनों आरोपियों की ओर से अधिवक्ता डी.डी. मुखोपाध्याय और अंकित मुखोपाध्याय ने पक्ष रखा। वहीं, अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी अधिवक्ता प्रवीर चट्टराज और अशोक घोष ने मामले की पैरवी की।

ट्रक चालकों के विवाद के बाद हुई थी मौत

पुलिस और न्यायालय से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024 के शुरुआती दिनों में कुल्टी थाना अंतर्गत चौरंगी फांड़ी के निकट राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 19 के ट्रक पार्किंग क्षेत्र में कुछ ट्रक चालकों के बीच विवाद हुआ था। इसी दौरान सुबोध कुमार यादव नामक ट्रक चालक की मौत हो गई थी।

घटना के बाद मृतक से संबंधित शिकायत के आधार पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया था। जांच के क्रम में पुलिस ने ट्रक चालक रविरंजन कुमार और छोटू साव को गिरफ्तार किया। दोनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 34 के तहत मामला दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी।

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने न्यायालय के समक्ष विभिन्न साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत किए। इसके बाद न्यायालय में मामले की सुनवाई शुरू हुई।

करीब 20 गवाहों के बयान दर्ज

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से करीब 20 गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज किए गए। गवाहों के बयान के अलावा पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजों पर भी अदालत में विचार किया गया।

करीब दो वर्ष से अधिक समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत गवाही और साक्ष्य आरोपियों के विरुद्ध अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

अधिवक्ता डी.डी. मुखोपाध्याय ने कहा कि पुलिस ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध हत्या और साझा आपराधिक उद्देश्य से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया था। हालांकि, सुनवाई के दौरान प्रस्तुत गवाही और साक्ष्यों से उनके मुवक्किलों के विरुद्ध आरोप प्रमाणित नहीं हो सके।

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साक्ष्यों के आधार पर आया न्यायालय का फैसला

बचाव पक्ष की ओर से अदालत में यह तर्क रखा गया कि मामले में प्रस्तुत साक्ष्य आरोपियों की संलिप्तता को निर्णायक रूप से स्थापित नहीं करते हैं। गवाहों के बयान और पुलिस द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषमुक्त करने का आदेश दिया।

फैसले के बाद दोनों आरोपियों को हत्या के मामले से बरी कर दिया गया। न्यायालय के इस निर्णय से मामले में लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया समाप्त हुई।

पुलिस द्वारा दर्ज मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होनी थी। सुनवाई के दौरान आरोप सिद्ध नहीं होने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी करने का निर्णय सुनाया।

वर्ष 2024 में ट्रक पार्किंग क्षेत्र में हुई ट्रक चालक की मौत के बाद शुरू हुई कानूनी प्रक्रिया बुधवार के न्यायालयीन फैसले के साथ एक महत्वपूर्ण चरण पर पहुंची। मामले में करीब दो वर्ष से अधिक समय तक चली सुनवाई, गवाहों के बयान और प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार के बाद दोनों आरोपियों को हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया।

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