
आसनसोल : चित्तरंजन रेलवे शहर में रेलवे प्रशासन ने अजीब तर्कों के आधार पर सभी क्लबों को उखाड़ने का निर्णय लिया है। इस संबंध में 15 मई को एक सार्वजनिक सूचना जारी की गई, जिसमें कहा गया है कि शहर के विभिन्न इलाकों में स्थित अवैध क्लबों की गतिविधियों से आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन क्लबों के खिलाफ रेलवे प्रशासन के पास कई शिकायतें आई थीं, जिनकी जांच के बाद यह फैसला लिया गया। रेलवे प्रशासन ने यह निर्णय लिया है कि अगले 60 दिनों के भीतर शहर के सभी अवैध क्लब भवनों को तोड़ दिया जाएगा। यदि क्लब प्रशासन अपनी जिम्मेदारी नहीं उठाता है, तो निर्धारित समय के बाद रेलवे कानून के तहत कार्रवाई करेगा।

इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए चित्तरंजन रेलवे मेंस कांग्रेस के महासचिव इंद्रजीत सिंह ने 17 मई को शहरवासियों की ओर से रेलवे के महाप्रबंधक को एक पत्र भेजा, जिसमें उन्होंने इस कदम को रोकने की अपील की। उन्होंने पत्र की एक प्रति आरपीएफ के आईजी को भी भेजी। इंद्रजीत सिंह ने अपने पत्र में क्लबों की विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक योगदानों की विस्तार से व्याख्या की। उन्होंने विशेष रूप से कोरोना महामारी के दौरान क्लबों द्वारा की गई सेवाओं का उल्लेख किया, जब क्लब सदस्य जनता की मदद में जुटे हुए थे।

इंद्रजीत सिंह ने चेतावनी दी कि अगर चित्तरंजन के 32 क्लब भवनों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया, तो इससे शहर में गंभीर सामाजिक और सांस्कृतिक संकट उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने रेलवे प्रशासन से अनुरोध किया कि वह इस निर्णय पर पुनर्विचार करें और इस समस्या का कोई वैकल्पिक समाधान निकाले।

शहरवासियों का कहना है कि क्लब न केवल एक मनोरंजन का स्थल है, बल्कि सामाजिक कार्यों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आपातकालीन सेवाओं में भी उनका अहम योगदान रहता है। इस निर्णय से चित्तरंजन में होने वाले सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों पर गहरी चिंता जताई जा रही है।














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