
पांडवेश्वर : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर से हलचल तब देखने को मिली जब कोलकाता उच्च न्यायालय ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 24 मई को पांडवेश्वर के बंकोला क्षेत्र में रैली और नुक्कड़ सभा करने की अनुमति प्रदान कर दी। यह आयोजन दोपहर 3:30 बजे से शाम 7 बजे तक किया जाएगा। अदालत के इस निर्णय के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है और इसके लिए व्यापक तैयारियां भी प्रारंभ हो चुकी हैं।
उल्लेखनीय है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और आसनसोल नगर निगम के पूर्व मेयर जितेंद्र तिवारी के नेतृत्व में 1 मई, श्रमिक दिवस के अवसर पर असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के मुद्दों को लेकर एक रैली और नुक्कड़ सभा आयोजित की जानी थी। परंतु स्थानीय प्रशासन द्वारा अनुमति न मिलने के कारण उस कार्यक्रम को स्थगित करना पड़ा। इस संबंध में जितेंद्र तिवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रैली स्थगित करने की घोषणा की थी और कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कही थी।

जितेंद्र तिवारी ने उस समय प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि तृणमूल कांग्रेस के दबाव में प्रशासन ने इस रैली की अनुमति नहीं दी, जबकि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के अधिकारों और उनके शोषण के विरुद्ध आवाज उठाना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा था कि मजदूरों के हितों के लिए भाजपा की लड़ाई जारी रहेगी।
अब जबकि हाईकोर्ट ने रैली और सभा की अनुमति प्रदान कर दी है, भाजपा ने इसके लिए व्यापक प्रचार-प्रसार और संगठनात्मक तैयारी शुरू कर दी है। कार्यकर्ता गाँव-गाँव जाकर लोगों को रैली में आमंत्रित कर रहे हैं। पार्टी का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक श्रमिक इस आयोजन में भाग लें और अपनी बात को सबके सामने रखें।

भाजपा के अनुसार यह रैली केवल राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह मजदूरों के अधिकार, न्यूनतम वेतन, सुरक्षा और सामाजिक सम्मान की लड़ाई का एक माध्यम है। भाजपा नेतृत्व का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस की सरकार श्रमिकों के मुद्दों को लगातार नजरअंदाज कर रही है और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक लगातार शोषण का शिकार हो रहे हैं।
इस रैली को देखते हुए स्थानीय प्रशासन भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सक्रिय हो गया है। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचने के लिए पुलिस बल की तैनाती, यातायात नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन, और निगरानी व्यवस्था की योजना बनाई जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था को बनाए रखना प्राथमिकता होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति में एक नया मोड़ ला सकता है। जहाँ रैलियों को लेकर पहले कई बार कानूनी विवाद और टकराव की स्थिति बनी है, वहीं अब कोर्ट के हस्तक्षेप से राजनीतिक दलों को एक समान अवसर मिल रहा है।
भाजपा ने इस रैली को जनसमर्थन और लोकतांत्रिक अधिकारों की विजय बताया है। जितेंद्र तिवारी ने कहा कि यह केवल रैली नहीं, बल्कि श्रमिकों की आवाज को सशक्त करने का प्रयास है, जो आने वाले समय में और तेज होगा।














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