
आसनसोल : कहते हैं कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, और इसका जीवंत उदाहरण बने हैं आसनसोल के बीस वर्षीय शुवेंदु माझी, जिन्होंने अपनी कठिन परिस्थितियों के बावजूद इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराया है। मिट्टी के घर में पले-बढ़े शुवेंदु ने 100 सर्टिफिकेट कोर्स पूरे कर यह उपलब्धि हासिल की है।
शुवेंदु का जन्म आसनसोल में हुआ और वर्तमान में वह कोलकाता के बंशद्रोणी में रहकर कॉलेज की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्हें बचपन से ही विभिन्न विषयों के बारे में जानने और खुद को निखारने की तीव्र इच्छा थी। बेहद गरीब परिवार से आने वाले शुवेंदु की मां घरों में काम करके उन्हें पालती थीं। उन्होंने बताया कि बचपन में कई बार उन्हें दो-दो दिन तक भूखा रहना पड़ा, और मोहल्ले के लोगों की ताने भी झेलने पड़े।

इन तमाम मुश्किलों के बावजूद शुवेंदु ने हार नहीं मानी। उन्होंने मुख्य रूप से कोडिंग, एथिकल हैकिंग और साइबर सिक्योरिटी जैसे तकनीकी विषयों पर ऑनलाइन माध्यम से सर्टिफिकेट कोर्स किए। उनकी यह कोशिश न सिर्फ आत्मविकास का माध्यम बनी बल्कि एक प्रेरक कहानी भी रच दी।
अब तक उन्होंने सौ से अधिक कोर्स पूरे कर लिए हैं और हर एक कोर्स का प्रमाणपत्र और उससे जुड़े मेडल उनके पास पहुँच चुके हैं। उनकी इस अनोखी उपलब्धि को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने मान्यता दी है।
शुवेंदु ने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं यहीं नहीं रुकूंगा। यह तो सिर्फ शुरुआत है। मैं आने वाले समय में और भी विषयों पर कोर्स करूँगा और अपने ज्ञान का विस्तार करूंगा।”

उनका यह प्रयास न केवल युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि डिजिटल शिक्षा के युग में मेहनत और लगन से कोई भी व्यक्ति आगे बढ़ सकता है, चाहे उसकी पारिवारिक या आर्थिक स्थिति कैसी भी क्यों न हो।
शुवेंदु माझी जैसे संघर्षशील युवाओं की कहानी समाज में यह विश्वास जगाती है कि यदि इच्छा शक्ति हो, तो कोई भी बाधा सफलता की राह में रोड़ा नहीं बन सकती।














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