
आसनसोल : आसनसोल के वरिष्ठ व्यवसायी एवं समाजसेवी सुरेन जलान ने सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट साझा करते हुए देश की मौजूदा राजनीतिक, सामाजिक एवं सांप्रदायिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अपनी पोस्ट में प्रतीकात्मक रूप से कहा, “चूहा पिंजरे में इसलिए फँसता है क्योंकि वह यह सोच ही नहीं पाता कि उसे मुफ्त खाना क्यों दिया जा रहा है।”
जलान ने यह कहकर शुरुआत की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व के शक्तिशाली नेताओं में से एक हैं, लेकिन भारत के भीतर देशविरोधी ताकतें अब भी राजनीतिक बहसों की आड़ में देश के टुकड़े करने की मानसिकता पाले हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार से हजारों किलोमीटर चलकर भारत तो आ गए, लेकिन चीन नहीं गए, क्योंकि वहां उन्हें गोली मारी जाती, जबकि भारत में राजनीतिक दलों ने उन्हें वोट बैंक बना लिया।
उन्होंने कहा कि जाकिर नाइक को मलेशिया जैसे मुस्लिम देश ने एक वर्ष भी सहन नहीं किया, लेकिन भारत में उसे कांग्रेस सरकार ने एक दशक तक धार्मिक सम्मान दिया। जलान ने पुलवामा और मुंबई अटैक जैसे आतंकी हमलों की चर्चा करते हुए सवाल उठाया कि जब 26/11 हुआ तब लोगों ने यह नहीं पूछा कि विस्फोटक कहाँ से आया, लेकिन जब पुलवामा हुआ, तो देश की सुरक्षा नीति पर सवाल उठने लगे।

उन्होंने दावा किया कि केवल हिंदू समाज ही राजनीतिक रूप से विभाजित है, जबकि मुस्लिम मतदाता एकजुट होकर रणनीतिक मतदान करते हैं। जलान ने इतिहास को उद्धृत करते हुए कहा कि यदि कट्टरता नहीं होती तो ना धर्म बचता और ना ही संस्कृति।
जलान ने राम मंदिर, अनुच्छेद 370, CAA, और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा ने देश के लिए बड़े निर्णय लिए, लेकिन हिंदुओं का पर्याप्त समर्थन उसे नहीं मिला। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हम मुफ्त राशन और बिजली पाने के लिए अपने भविष्य और राष्ट्रहित को गिरवी रख रहे हैं?
उन्होंने चेताया कि “यदि हम मुफ्त सुविधाओं के मोह में पिंजरे के चूहे बनते रहेंगे, तो आने वाली पीढ़ी बर्बाद हो जाएगी।” उन्होंने बंगाल के विभाजन के इतिहास की चर्चा करते हुए कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और डॉ. मेघनाद साहा जैसे नेताओं के संघर्ष के कारण ही बंगाली हिंदुओं को पश्चिम बंगाल मिला था, जिसे मुस्लिम लीग और सुराबर्दी ने विरोध के बावजूद स्वीकारना पड़ा।

जलान ने मौलाना भसानी के बयान को उद्धृत करते हुए कहा कि “असम, त्रिपुरा और बंगाल बांग्लादेश के हिस्से हैं”, और आज भी कट्टरपंथी सोच के लोग उसी मानसिकता के तहत राज्य में अपनी संख्या बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने आंकड़ों के माध्यम से दिखाया कि कैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में वोटिंग प्रतिशत 94% तक पहुँचता है और उनका 91% वोट सत्ताधारी दल को जाता है। 1951 से 2021 तक के आंकड़े देते हुए उन्होंने कहा कि मुस्लिम जनसंख्या लगातार बढ़ी है और अब आईएसएफ जैसी राजनीतिक पार्टी बन चुकी है जो 2026 में सत्ता में आ सकती है।
पोस्ट के अंत में उन्होंने चेतावनी दी कि “आज भाजपा कार्यकर्ताओं की पिटाई हो रही है, कल हमें हिंदू कहलाने के लिए जान देनी पड़ सकती है।” उन्होंने कहा कि गजवतुल हिंद जैसी धार्मिक भविष्यवाणियाँ अब आतंक के रूप में सामने आ रही हैं और यह समय है कि हिंदू समाज एकजुट होकर अपनी अस्मिता और संस्कृति की रक्षा करे।
उन्होंने आग्रह किया कि यह किसी पार्टी का समर्थन नहीं, बल्कि राष्ट्रहित और सनातन संस्कृति की रक्षा का प्रश्न है। यदि आज भी हिंदू समाज नहीं जागा, तो भविष्य में पछताने के अलावा कुछ नहीं बचेगा।














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