
आसनसोल : अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन, पश्चिम बंगाल प्रदेश की ओर से एक दिवसीय निःशुल्क ऑनलाइन “नो योर करेंसी” कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य था—बच्चों को ग्रीष्मावकाश के दौरान रोचक एवं ज्ञानवर्धक विषयों की जानकारी देना, जिससे उनकी सोच विकसित हो और वे वित्तीय साक्षरता की दिशा में आरंभिक समझ बना सकें।
इस विशेष आयोजन का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती बिनीता अग्रवाल ने किया। उनके कुशल मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से पूरा कार्यक्रम अत्यंत व्यवस्थित और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यशाला का संचालन प्रदेश बाल विकास प्रमुख श्रीमती निधि पसारी ने किया, जिनकी सक्रिय भूमिका ने पूरे आयोजन को जीवंत बना दिया। उनके साथ बाल विकास सह प्रमुख श्रीमती स्नेहा खेमानी ने भी इस आयोजन में सहयोग दिया।

कार्यशाला की मुख्य ट्रेनर रहीं लिटिल रेनबो टीम की अति बगड़िया एवं साक्षी बग्गा, जिन्होंने बच्चों को मनी एंड करेंसी अर्थात मुद्रा और उसकी प्रकृति, विकास, पहचान और उपयोग से संबंधित कई रोचक एवं ज्ञानवर्धक तथ्यों से अवगत कराया। बच्चों ने इस पूरे सत्र में सक्रिय भागीदारी दिखाई और आनंदपूर्वक नई जानकारियाँ प्राप्त कीं।
कार्यक्रम के समापन पर प्रदेश अध्यक्ष बिनीता अग्रवाल ने सभी को धन्यवाद देते हुए कहा कि “हमारा उद्देश्य है बच्चों में नई सोच, समझ और जागरूकता विकसित करना। ऐसी कार्यशालाएँ बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में भी ऐसे रचनात्मक एवं शिक्षाप्रद कार्यक्रमों का आयोजन जारी रहेगा।
प्रांतीय सचिव श्रीमती कंचन ड्रोलिया ने कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि “इस प्रकार के कार्यक्रम बच्चों को आधुनिक विषयों की ओर आकर्षित करते हैं और उनकी मानसिक क्षमता को प्रोत्साहन देते हैं।” साथ ही उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी बहनों के योगदान को सराहा और आभार व्यक्त किया।
प्रदेश कोषाध्यक्ष श्रीमती नीलू अग्रवाल को भी इस आयोजन में उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया गया। आयोजकों के अनुसार इस कार्यशाला में कुल 40 बच्चों ने भाग लिया, जो पूरे कार्यक्रम के दौरान उत्साहपूर्वक जुड़े रहे।

पश्चिम बंगाल प्रदेश के वरिष्ठ पदाधिकारीगण एवं विभिन्न शाखाओं की बहनों ने इस कार्यशाला में भाग लेकर बच्चों का मनोबल बढ़ाया। वहीं, अभिभावकों ने भी सम्मेलन द्वारा किए गए इस प्रयास की भूरी-भूरी प्रशंसा की और कहा कि “ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों को सीखने के साथ-साथ तकनीकी और रचनात्मक कौशल का भी विकास होता है।”
कार्यक्रम के अंत में जिन भी बहनों ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से योगदान दिया, सभी को विशेष रूप से धन्यवाद ज्ञापित किया गया। यह कार्यशाला न केवल एक शैक्षणिक पहल थी, बल्कि बच्चों के लिए नई दिशा में सोचने का अवसर भी थी। इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं, बल्कि व्यवहारिक ज्ञान भी आवश्यक है।














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