
सालनपुर : पश्चिम बर्दवान जिले के सालनपुर प्रखंड अंतर्गत बाराभुई गांव में घटिया राशन वितरण को लेकर सोमवार को ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने इंसानों के खाने लायक न होने वाले आटे के पैकेट हाथों में लेकर सालनपुर बीडीओ कार्यालय के सामने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप था कि सरकारी राशन के तहत उन्हें ऐसा आटा दिया जा रहा है जो बदबूदार, बासी और अखाद्य है।
गांववालों ने सड़कों पर आटा बिखेरते हुए प्रशासन से तीखे सवाल किए—“क्या यह आटा अफसर खुद खा सकते हैं?” उन्होंने प्रशासनिक जांच को महज खानापूरी बताया और कहा कि बार-बार शिकायतों के बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना था कि पहले भी कई बार खराब राशन की शिकायत की गई, लेकिन हर बार जांच रिपोर्ट में गुणवत्ता सही बताई गई और डीलरों को क्लीन चिट दे दी गई।

इस दिन प्रदर्शनकारी जब बीडीओ कार्यालय पहुंचे तो अधिकारी देबांजन विश्वास ने दो प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया। लेकिन आक्रोशित ग्रामीणों ने कार्यालय के भीतर जाने से इनकार कर दिया और आटे के पैकेट व ज्ञापन कार्यालय के बाहर ही छोड़ दिए। ग्रामीणों ने व्यंग्य में कहा, “इस आटे को बीडीओ साहब खुद खाएं, तभी असली सच्चाई सामने आएगी।”
खाद्य विभाग के सब-इंस्पेक्टर बिनेश्वर राय ने बताया कि पूर्व शिकायत के आधार पर आटे का नमूना प्रयोगशाला भेजा गया था, जिसमें गुणवत्ता सही पाई गई। लेकिन ग्रामीण इस रिपोर्ट को मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि यह जांच प्रक्रिया गरीबों की व्यथा को नजरअंदाज करने का तरीका बन गई है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में फिर से ऐसा घटिया आटा वितरित किया गया तो आंदोलन का स्वरूप और उग्र होगा। वे गुणवत्तापूर्ण राशन, दोषियों पर कार्रवाई और पारदर्शी वितरण प्रणाली की मांग कर रहे हैं।

बाराभुई गांव का यह विरोध केवल एक गांव की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की गूंजती हुई चेतावनी है। सड़कों पर बिखरे आटे के दाने अब केवल खाद्यान्न नहीं, बल्कि उपेक्षित गरीबों के आत्मसम्मान की पुकार हैं।














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