

रानीगंज : रानीगंज के टीडीबी कॉलेज के प्रोफेसर पार्सल किस्कू के खिलाफ लगाए गए कथित झूठे आरोपों और उनके साथ हुए दुर्व्यवहार के विरोध में सोमवार को आदिवासी संगठनों ने शहर में जोरदार प्रदर्शन किया। दिशम आदिवासी गावता और पश्चिम बंग आदिवासी कल्याण समिति के आह्वान पर आयोजित इस विशाल विरोध रैली में सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज के लोगों ने भाग लिया।

प्रदर्शनकारियों का जुलूस रानीगंज रेलवे स्टेशन से शुरू होकर एनएसबी रोड होते हुए रानीगंज थाना पहुंचा। इस दौरान पूरे मार्ग पर आदिवासी झंडों, पारंपरिक परिधानों और नारेबाजी के साथ प्रदर्शनकारियों का उत्साह चरम पर था। रैली में महिलाओं और युवाओं की बड़ी भागीदारी ने आंदोलन को और सशक्त बना दिया। जैसे ही जुलूस थाना पहुंचा, वहां जोरदार प्रदर्शन शुरू हुआ और ‘न्याय चाहिए’ के नारे गूंजने लगे।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रोफेसर किस्कू को झूठे आरोपों के जरिए मानसिक प्रताड़ना दी गई, जो न केवल एक शिक्षाविद् का अपमान है बल्कि आदिवासी समाज की गरिमा पर भी चोट है। आदिवासी नेता मनोज मांडी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह घटना आदिवासी समाज के आत्मसम्मान पर हमला है। हम इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। जब तक प्रोफेसर किस्कू को न्याय नहीं मिलेगा, हमारा आंदोलन जारी रहेगा।”

उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि मामले में लीपापोती की गई तो आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है।
इस बड़े विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने रानीगंज थाना परिसर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया था। बड़ी संख्या में पुलिस बल और कॉम्बैट फोर्स की तैनाती कर किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने की तैयारी की गई थी। प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए रानीगंज शहर में ट्रैफिक भी प्रभावित हुआ, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

हालांकि, पुलिस की सतर्कता और आंदोलनकारियों की संयमित भागीदारी के कारण स्थिति नियंत्रण में रही। थाने पर एक प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट किया कि वे तब तक शांत नहीं बैठेंगे जब तक उन्हें संतोषजनक न्याय नहीं मिल जाता।
यह प्रदर्शन न केवल प्रोफेसर किस्कू के प्रति समर्थन का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आदिवासी समाज अब अपने अधिकार और सम्मान के लिए एकजुट होकर आवाज़ उठाने को तैयार है। अब यह देखना बाकी है कि प्रशासन इस मामले को कितनी संवेदनशीलता और निष्पक्षता से सुलझाता है।














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