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एक साल बाद भी दुकानें नहीं मिलीं, चांदमारी में बढ़ा आक्रोश

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आसनसोल :  रेलवे लाइन के पार स्थित चांदमारी क्षेत्र में पीड़ित अस्थायी दुकानदार आज भी पुनर्वास की आस में भटक रहे हैं। एक वर्ष पूर्व लोक निर्माण विभाग (पब्लिक हेल्थ टेक्निकल डिपार्टमेंट) द्वारा क्षेत्र में विकास कार्यों के नाम पर 17 अस्थायी दुकानों को तोड़ दिया गया था। उस समय संबंधित अधिकारियों ने यह आश्वासन दिया था कि सभी प्रभावित दुकानदारों को शीघ्र ही वैकल्पिक स्थानों पर दुकानें उपलब्ध कराई जाएंगी।लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो कोई वैकल्पिक स्थान मिला और न ही कोई ठोस जानकारी प्रशासन की ओर से दी गई।

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इससे दुकानदारों में भारी नाराजगी है। उनकी आजीविका का एकमात्र सहारा छिन गया है और अब वे बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं।एक दुकानदार ने दुख जताते हुए कहा, “मेरे परिवार की पूरी आजीविका इसी दुकान पर निर्भर थी। पिछले एक साल से केवल आश्वासन मिल रहे हैं, पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पीडब्ल्यूडी के कार्यालय के कई चक्कर लगाने के बाद भी केवल इंतज़ार करने को कहा जाता है। आखिर कब तक?”इस मुद्दे पर स्थानीय व्यवसायिक संगठनों और आम नागरिकों ने प्रशासन से पुनर्वास की प्रक्रिया तुरंत शुरू करने की मांग की है।

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उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन जल्द निर्णय नहीं लेता, तो दुकानदार आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्यों की आड़ में लोगों के जीवन को अस्त-व्यस्त करना प्रशासन की लापरवाही का परिचायक है। “जिनके घर का चूल्हा इन दुकानों से जलता था, आज वे घर चलाने को मजबूर हैं,” – एक नागरिक ने नाराजगी जताई।अब सवाल यह उठ रहा है कि एक साल बीत जाने के बाद भी प्रशासन अपनी बात पर अमल क्यों नहीं कर पाया? क्या केवल आश्वासन देकर जिम्मेदारी पूरी हो जाती है?चांदमारी के पीड़ित दुकानदारों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। क्षेत्र में असंतोष की लहर धीरे-धीरे बढ़ रही है। यदि शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया, तो यह प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

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स्थानीय लोग चाहते हैं कि विकास कार्य हो, लेकिन किसी की रोजी-रोटी उजाड़कर नहीं। दुकानदारों को पुनः बसाना केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नैतिक कर्तव्य भी है। अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन कब जागता है और कब चांदमारी के दुकानदारों को उनका हक मिलता है।

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