
पुरुलिया : झालदा-2 प्रखंड अंतर्गत बामनिया बेलाड़ी ग्राम पंचायत के बरुयाकोचा से पाडुया को जोड़ने वाली संपर्क सड़क शालदाह नदी से होकर गुजरती है। इस नदी पर स्थायी पुल का अभाव लंबे समय से स्थानीय ग्रामीणों की गंभीर समस्या बना हुआ है। बारिश के दिनों में स्थिति और भी विकट हो जाती है, जब नदी का जलस्तर बढ़ने से गांवों का संपर्क पूरी तरह कट जाता है।
बरुयाकोचा, पटमदी, नवागोर जैसे गांवों के निवासी बेगुनकोदर, चतांबरी हाई स्कूल और कोटशिला बाजार जैसी आवश्यक सेवाओं से वंचित हो जाते हैं। छात्रों और मरीजों को विशेष रूप से परेशानी होती है। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क तो मौजूद है, लेकिन नदी पार करने के लिए उन्हें छह किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बर्बादी होती है।

स्थानीय निवासी दारिक सिंह मुरा और संतोषी मुर्मू ने बताया कि यह समस्या वर्षों पुरानी है। हर चुनाव में नेताओं द्वारा पुल निर्माण का वादा जरूर किया गया, लेकिन काम अब तक शुरू नहीं हुआ। मानसून के पहले ग्रामीणों को मजबूरी में आपसी सहयोग से अस्थायी लकड़ी और बांस का पुल बनाना पड़ता है ताकि दैनिक आवागमन किसी तरह चल सके।
ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी पुल के निर्माण की मांग दोहराई है और कहा है कि केवल चुनावी वादों से उनका जीवन नहीं चल सकता। बरसात के समय इस नदी में जलस्तर इतना बढ़ जाता है कि किसी भी अस्थायी उपाय से पार पाना जान जोखिम में डालने जैसा हो जाता है।

इस विषय पर जब बामनिया बेलाड़ी ग्राम पंचायत की प्रधान परी कैवर्त से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस समस्या की जानकारी है। उन्होंने स्वीकार किया कि पंचायत के सीमित संसाधनों से इतना बड़ा पुल बनवाना संभव नहीं है। लेकिन वे इस मुद्दे को उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाएंगी ताकि जल्द ही सरकारी सहायता से पुल निर्माण का रास्ता प्रशस्त हो सके।
ग्रामीणों को अब उम्मीद है कि उनकी पीड़ा पर सरकार ध्यान देगी और शालदाह नदी पर एक स्थायी और मजबूत पुल बनाकर क्षेत्र को राहत पहुंचाई जाएगी। फिलहाल, उन्हें फिर से मानसून आने से पहले अपनी मेहनत से अस्थायी पुल तैयार करने की तैयारी करनी पड़ रही है।














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