
आसनसोल : ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के सोनेपुर-बाजारी क्षेत्र के महाप्रबंधक पर गंभीर नैतिक आरोप लगे हैं। यह आरोप पूर्व विधायक और आसनसोल नगर निगम के पूर्व मेयर जितेन्द्र कुमार तिवारी ने कंपनी के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक को प्रेषित एक पत्र में लगाए हैं।
अपने पत्र में श्री तिवारी ने आरोप लगाया है कि 12 जून 2025 को दोपहर 12:30 बजे से 1:30 बजे के बीच सोनेपुर-बाजारी क्षेत्र के महाप्रबंधक ने पांडवेश्वर विधानसभा क्षेत्र के विधायक के निजी आवास पर बंद कमरे में बैठक की, जिसमें मोईजुल शाह नामक एक व्यक्ति भी उपस्थित था।

श्री तिवारी ने पत्र में लिखा है कि उक्त मोईजुल शाह पर पांडवेश्वर थाना कांड संख्या 34/2025 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 308(2)/351(2) (BNS Act) के अंतर्गत गंभीर आपराधिक आरोप दर्ज हैं। उस पर कोयला खरीदने वाले वैध डी.ओ. धारकों से रंगदारी कर (अवैध वसूली) की मांग करने का आरोप है।
पूर्व विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि इस प्रकार के बंद कमरे की गुप्त बैठक, वह भी ऐसे व्यक्ति की उपस्थिति में जो कानूनी रूप से आरोपी है, ईसीएल अधिकारियों की भूमिका को संदेह के घेरे में लाती है। इससे यह आशंका और बलवती होती है कि ईसीएल के कुछ अधिकारी कोयले की वैध खरीद-बिक्री व्यवस्था में भ्रष्टाचार व रंगदारी टैक्स वसूली में अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष रूप से संलिप्त हो सकते हैं।

श्री तिवारी ने पत्र में कहा है कि ईसीएल जैसी प्रतिष्ठित संस्था की छवि धूमिल करने की मंशा रखने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने सीएमडी से आग्रह किया कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जाए और जो भी दोषी हों, उनके विरुद्ध आवश्यक अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएं।
पूर्व विधायक ने यह भी संकेत दिया कि सोनेपुर-बाजारी क्षेत्र के अतिरिक्त ईसीएल के अन्य क्षेत्रों में भी रंगदारी कर की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। ऐसी घटनाएं न केवल उपभोक्ताओं और वैध डी.ओ. धारकों में भय का वातावरण उत्पन्न करती हैं, बल्कि कोल इंडिया की छवि को भी नुकसान पहुंचाती हैं।

अपने पत्र के अंत में जितेन्द्र कुमार तिवारी ने यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी संस्था या अधिकारी को बदनाम करना नहीं, बल्कि कोयला क्षेत्र में पारदर्शिता और ईमानदारी को बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इस प्रकार की गैरकानूनी गतिविधियों पर लगाम नहीं लगी, तो भविष्य में कोयला उद्योग की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग सकते हैं।
ईसीएल मुख्यालय या संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक इस प्रकरण पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, इस पत्र के सामने आने के बाद कोल सेक्टर से जुड़े संगठनों और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।














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