
आसनसोल : शिक्षा केवल भवनों में नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति से शुरू होती है—इस विचार को जीवंत किया है पश्चिम बर्दवान जिले के जामुड़िया स्थित नामो पाड़ा प्राइमरी स्कूल के प्रधानाध्यापक दीप नारायण नायक ने। अपने नवाचारों और समाजोत्थान के प्रयासों से वह अब ‘स्ट्रीट मास्टर’ के नाम से पहचाने जा रहे हैं।

दीप नारायण नायक का ‘थ्री-जेनेरेशन लर्निंग मॉडल’ केवल एक शैक्षणिक प्रयोग नहीं, बल्कि सामाजिक जागरण की लहर है। इस मॉडल में एक ही परिवार की तीन पीढ़ियां—पोती, मां और दादी—एक साथ पढ़ती हैं। इसमें पारिवारिक संबंधों के आधार पर कक्षाएं बनती हैं, जहां पोती अपनी दादी को अक्षर सिखाती है और मां को हस्ताक्षर करना सिखाया जाता है।

दीप नारायण का मानना है, “अगर दीवारें हैं, तो उन्हें ब्लैकबोर्ड बनाओ; अगर छत नहीं है, तो आकाश को छत बना लो; और अगर शिक्षक नहीं हैं, तो छात्र को ही शिक्षक बना दो।” इस सिद्धांत पर चलते हुए उन्होंने कोविड काल में सड़कों, पेड़ों के नीचे और दीवारों पर कक्षाएं चलाईं।
उनके इस मॉडल में सिर्फ अक्षरज्ञान नहीं, भाषा, रोजगार और संस्कृति की भी शिक्षा दी जाती है। बंगाली, हिंदी, अंग्रेजी और संथाली भाषाओं के साथ साथ कंथा सिलाई, टोकरी निर्माण, पटचित्र कला जैसे कौशल सिखाए जाते हैं। वहीं, आदिवासी गीत, नृत्य और खेलों के माध्यम से संस्कृति का पुनरुद्धार भी किया जा रहा है।
लक्ष्मी सोरेन, सुकुरमोनी सोरेन और राधिका सोरेन जैसी मां-बेटी-दादी की त्रयी इस क्रांति की सजीव मिसाल हैं। जामाडोबा, नीलपुर जैसे आदिवासी गांवों से शुरू हुई यह पहल अब उत्तर बंगाल, सुंदरवन, झारखंड और छत्तीसगढ़ तक पहुंच चुकी है। अब तक 100 से अधिक गांवों में 18,000 से अधिक परिवार इस शिक्षा और जागरूकता अभियान से लाभान्वित हुए हैं।

दीप नारायण को 2023 में यूनेस्को महासभा में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला और उन्हें ग्लोबल टीचर प्राइज से सम्मानित किया गया। वह इस पुरस्कार को पाने वाले एकमात्र भारतीय और बंगाली शिक्षक हैं। उनका नवाचार फिनलैंड के हेलसिंकी में आयोजित हंड्रेड इनोवेशन समिट में भी सराहा गया।
पश्चिम बर्दवान के शिक्षा विभाग के एडीएम संजय पाल ने कहा, “दीप नारायण पर हमें गर्व है। हम उनके अनुभवों का लाभ जिले के छात्रों को देना चाहते हैं।”
दीप नारायण का मानना है, “सीढ़ियां नहीं हैं? तो क्या हुआ, हम पुल बना सकते हैं। शिक्षा धन नहीं, भावना से शुरू होती है।” उनका यह विचार आज गांव-गांव में साक्षरता की लौ जला रहा है और समाज में एक शांत लेकिन दृढ़ बदलाव का वाहक बन चुका है।














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