
आसनसोल : पश्चिम बर्दवान जिले की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शिवदासन दासु ने पार्टी के जिला अध्यक्ष नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती पर भ्रष्टाचार, गुटबाजी और भाजपा नेताओं से密संपर्क रखने जैसे गंभीर आरोप लगा दिए। दासु की सोशल मीडिया पोस्ट ने न केवल पार्टी के भीतर खलबली मचा दी है, बल्कि यह संकेत भी दे दिया है कि तृणमूल कांग्रेस अब भीतरघात और अंतर्विरोधों से जूझ रही है।फेसबुक पर सार्वजनिक रूप से दासु ने लिखा, “भाजपा से密संबंध बना रहे हैं हमारे ही नेता!” उन्होंने कहा कि शुभेंदु अधिकारी जैसे विपक्षी नेता से तृणमूल के कुछ वरिष्ठ नेता密संपर्क में हैं, जिससे पार्टी की नींव कमजोर होती जा रही है और भाजपा का प्रभाव क्षेत्र बढ़ रहा है।दासु ने विशेष रूप से पांडेश्वर विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां पहले तृणमूल को एक लाख वोटों की बढ़त मिलती थी, वह अब घटकर महज 40 हजार रह गई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि ईमानदार और समर्पित कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया गया है और उनकी जगह ऐसे नेताओं को तरजीह दी जा रही है जो भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और विपक्षी खेमे से密संपर्क में हैं।इस आरोपों की राजनीतिक गूंज तब और तेज हो गई जब तृणमूल के धुर विरोधी और पूर्व मेयर व भाजपा नेता जितेंद्र तिवारी ने दासु के बयान का समर्थन करते हुए कहा, “दासु ने वही सच कहा है जो हम वर्षों से कहते आ रहे हैं। अब जब तृणमूल के भीतर से ही आवाज उठ रही है, तो सच्चाई अब छुप नहीं सकती।”

इस पूरे मामले पर अब तक न तो जिला अध्यक्ष नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती की ओर से और न ही तृणमूल कांग्रेस के राज्य नेतृत्व की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया आई है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि दासु को जल्द ही पार्टी की ओर से कारण बताओ नोटिस भेजा जा सकता है।\राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की आंतरिक खींचतान और असंतोष तृणमूल के लिए आगामी 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा संकट बन सकता है। पश्चिम बर्दवान जैसे जिले, जहां तृणमूल का मजबूत जनाधार रहा है, वहां यदि नेतृत्व पर सवाल उठते हैं तो यह भाजपा जैसे विरोधी दलों को सीधी राजनीतिक बढ़त देने का काम करेगा।














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