
आसनसोल/पांडेश्वर : झांझरा क्षेत्र में कार्यरत ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के महाप्रबंधक (जीएम) पर राजनीतिक पक्षपात, भ्रष्टाचार और गैर-पेशेवर गतिविधियों में लिप्त होने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों को लेकर पूर्व विधायक और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता जितेंद्र कुमार तिवारी ने ईसीएल के चेयरमैन सह प्रबंध निदेशक को एक औपचारिक शिकायत पत्र भेजा है, जिससे पूरे विभाग में खलबली मच गई है।शिकायती पत्र में तिवारी ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि 15 जून 2025 की रात 9:45 बजे से 10:30 बजे तक ईसीएल झांझरा क्षेत्र के महाप्रबंधक ने तृणमूल कांग्रेस के दुर्गापुर जिला कार्यालय में बैठक की। उन्होंने इसे स्पष्ट रूप से राजनीतिक गतिविधि करार दिया और सवाल उठाया कि एक सरकारी अधिकारी आखिर कैसे किसी राजनीतिक दल के कार्यालय में बैठक कर सकता है?तिवारी के अनुसार, इस बैठक में ऐसे व्यक्ति भी उपस्थित थे, जिन पर झांझरा क्षेत्र के डिलीवरी ऑर्डर (डीओ) धारकों से अवैध वसूली करने का आरोप है और जिनका सीधा संबंध तृणमूल कांग्रेस के जिला अध्यक्ष नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती से है।

उन्होंने कहा कि यह स्थिति ईसीएल जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठान की छवि और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।भाजपा नेता ने अपने पत्र में तृणमूल कांग्रेस नेता नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती द्वारा हाल में दिए गए भारतीय सेना और केंद्र सरकार विरोधी बयानों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे विवादास्पद नेता के निकट सहयोगियों के साथ ईसीएल के उच्च अधिकारी की घनिष्ठता, सरकारी पद की मर्यादा और शपथ का उल्लंघन है। तिवारी ने पूछा— “क्या अब ईसीएल के जीएम सरकारी अधिकारी हैं या तृणमूल के रणनीतिकार?”उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चक्रवर्ती के बयानों की भी निंदा की और कहा कि ऐसे नेताओं से निकटता राष्ट्रीय सुरक्षा और लोक विश्वास के लिए भी खतरा है।तिवारी ने झांझरा क्षेत्र में लंबे समय से कोयला चोरी, उत्पादन में गड़बड़ी, और रिपोर्टिंग में हेराफेरी की बात भी उठाई और इन घटनाओं में GM की भूमिका पर संदेह जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि GM जानबूझकर गलत आंकड़े पेश कर रहे हैं, जिससे कंपनी को आर्थिक नुकसान हो रहा है और भ्रष्ट तंत्र को संरक्षण मिल रहा है।भाजपा नेता ने चेयरमैन से इस पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि इस शिकायत की सही ढंग से जांच की जाए, तो यह कोयला उद्योग में छिपे भ्रष्टाचार के कई चेहरे उजागर कर सकता है।इस पूरे घटनाक्रम पर ईसीएल प्रबंधन, न ही झांझरा क्षेत्र के GM, और न ही तृणमूल कांग्रेस के किसी वरिष्ठ नेता की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

हालांकि राजनीतिक हलकों में इस पत्र को लेकर चर्चा तेज हो गई है और यह संभावना जताई जा रही है कि मामला ईसीएल मुख्यालय में गंभीरता से लिया जा सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आरोप सिद्ध होते हैं तो ईसीएल जैसे सार्वजनिक प्रतिष्ठान की साख और प्रशासनिक स्वतंत्रता पर गंभीर आघात पहुंचेगा। वहीं विपक्षी दल इसे आगामी चुनावों से पहले बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में हैं।














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