
आसनसोल : राज्य सरकार ने श्रमिकों की जान लेने वाली गंभीर बीमारी सिलिकोसिस पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए हैं। आगामी तीन महीनों में राज्य के 28 जिलों में कुल 46 सिलिकोसिस निदान शिविर आयोजित किए जाएंगे। इस संबंध में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा एक अधिसूचना जारी की गई है, जिसमें जिलावार शिविरों के आयोजन का पूरा खाका तैयार किया गया है।राज्य सरकार ने प्रत्येक शिविर पर 10,000 रुपये खर्च की मंजूरी देते हुए कुल 4.60 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया है। इन शिविरों में दवाइयों, दोपहर भोजन और जरूरी संसाधनों की व्यवस्था इसी राशि से की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार, पश्चिम बर्दवान जिले में तीन शिविर लगाए जाएंगे। विशेष जोर सालानपुर, जामुड़िया जैसे उन ब्लॉकों पर रहेगा, जहां पहले से सिलिकोसिस के मामले सामने आ चुके हैं।सिलिकोसिस, पत्थर खदानों, क्रशिंग मिलों, संगमरमर फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों के फेफड़ों पर सीधा हमला करती है। लगातार धूल और बारीक चूर्ण को सांस के ज़रिए अंदर लेने से यह बीमारी होती है। नाक-मुंह पर उन्नत मास्क का अभाव और सुरक्षात्मक उपायों की अनदेखी से श्रमिक इसका शिकार बनते हैं। पहले लक्षणों में खांसी, बुखार, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ प्रमुख होते हैं।पश्चिम बर्दवान के सालानपुर ब्लॉक में इस बीमारी से कई लोगों की मौत हो चुकी है। अब सरकार का फोकस प्राथमिक स्तर पर पहचान और इलाज सुनिश्चित करने पर है।स्वास्थ्य शिविरों के अलावा राज्य सरकार जल्द ही एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने जा रही है, जिसके माध्यम से सिलिकोसिस पीड़ित या उनका परिवार निदान, इलाज और आर्थिक सहायता के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। यह पोर्टल श्रम विभाग के अधीन वेबल (WEBEL) द्वारा विकसित किया जा रहा है। इससे पीड़ितों को सरकारी मदद तक शीघ्र और सरल पहुंच मिलेगी।

सरकार ने जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे शिविरों के आयोजन को लेकर विशेष सक्रियता दिखाएं। साथ ही, इस बीमारी को रोकने के लिए जनजागरूकता अभियान, उचित सुरक्षा उपायों की निगरानी, और फैक्ट्रियों में श्रमिकों को मास्क व सुरक्षा उपकरण देने जैसे प्रयास भी तेज किए जाएं।जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पहल सही तरीके से लागू की जाए, तो सिलिकोसिस जैसी जानलेवा बीमारी से हजारों मजदूरों की जान बचाई जा सकती है। ऐसे शिविर रोग की प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर प्रभावी इलाज का मार्ग प्रशस्त करेंगे, जिससे बीमारी के प्रसार को रोका जा सकेगा।राज्य सरकार की यह पहल श्रमिकों के स्वास्थ्य और अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।














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